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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम के दौरान जाति आधारित असमानता और सामाजिक-आर्थिक भागीदारी को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज देश दो हिस्सों में बंटता जा रहा है—एक ऐसा भारत, जो सत्ता, धन और अवसरों पर काबिज है, और दूसरा भारत, जिसमें दलित, पिछड़े, आदिवासी और मजदूर हैं, जिनकी आबादी तो 90% है, लेकिन निर्णय लेने वाले स्थानों पर उनकी भागीदारी बेहद सीमित है।
राहुल ने उदाहरण देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के 90 सचिवों में से केवल तीन ऐसे हैं जो सामाजिक रूप से वंचित समुदायों से आते हैं—वो भी ऐसे विभागों में, जहां धन या शक्ति का खास प्रभाव नहीं होता। उन्होंने सवाल किया कि क्या कभी आपने किसी बड़ी प्राइवेट कंपनी में दलित, आदिवासी या OBC को सीईओ देखा है? “500 बड़ी कंपनियों में से किसी एक में भी नहीं।” उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी ये समुदाय हाशिए पर हैं। “पहले सरकारी अस्पताल होते थे, अब प्राइवेट अस्पताल हैं। प्राइवेट अस्पतालों को सरकार जमीन देती है, लेकिन उस जमीन का मालिक कौन? समाज का वंचित वर्ग नहीं।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि न्यायपालिका, नौकरशाही और शिक्षा व्यवस्था में भी यही असंतुलन है।
राहुल गांधी ने जाति जनगणना को केवल एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि सच्चाई जानने का पहला कदम बताया। उन्होंने कहा “मैंने आज तक कोई नीति नहीं सुझाई। मैं सिर्फ एक बात कह रहा हूँ – पता लगाना चाहिए कि इस देश में किसकी कितनी भागीदारी है।” उन्होंने इसे एक X-ray से तुलना करते हुए कहा, “अगर आपकी हड्डी टूटी हो और डॉक्टर कहे कि X-ray नहीं करेंगे, तो आप कैसे इलाज करोगे?” तेलंगाना का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वहां की सरकार ने हर घर जाकर डेटा इकट्ठा किया, कई बार जाकर पुष्टि की—यह तरीका पारदर्शिता और सहभागिता का उदाहरण है। इसके उलट उन्होंने बीजेपी सरकार के मॉडल को तानाशाही जैसा बताते हुए कहा कि”वे सवाल खुद तय करते हैं, और जवाब देने की इजाजत भी अपने हिसाब से देते हैं।”
उबेर ड्राइवरों और डिलीवरी बॉयज़ की सूची का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि “जब आप नीचे के स्तर पर देखेंगे, तो ड्राइवर, डिलीवरी बॉय, मजदूर सभी दलित, पिछड़े और आदिवासी ही मिलेंगे। इससे साफ है कि समाज में अवसरों का बंटवारा कितना एकतरफा है।” उन्होंने चेतावनी दी कि जिस दिन सही जाति जनगणना होगी, देश की सच्चाई पूरी तरह सामने आ जाएगी, और वह दिन इस संघर्ष के इतिहास में निर्णायक मोड़ साबित होगा।