दुनिया में जब भी कोई युद्ध या बड़ा भू-राजनीतिक तनाव पैदा होता है, उसका असर सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रोजमर्रा की चीज़ों पर भी पड़ता है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अब कंडोम उद्योग को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण सप्लाई चेन बाधित हो रही है, जिससे भारत सहित कई देशों में कंडोम की कमी की आशंका बढ़ गई है।

कंडोम बनाने के लिए पेट्रो-केमिकल उत्पाद, सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल की जरूरत होती है। समुद्री मार्गों में रुकावट और बढ़ते तनाव की वजह से इनकी सप्लाई प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमोनिया की कीमतों में करीब 50% तक बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ेगा। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत में कंडोम की खुदरा कीमतों में भी लगभग 50% तक इजाफा हो सकता है। इससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। भारत का कंडोम बाजार करीब 8,170 करोड़ रुपये का है, जो इसे एक बड़ा उद्योग बनाता है। भारत न केवल घरेलू मांग पूरी करता है, बल्कि 36 से अधिक देशों को निर्यात भी करता है, जिनमें अमेरिका और अफ्रीकी देश शामिल हैं।

हालांकि, मौजूदा वैश्विक संकट के कारण भारत की यह इंडस्ट्री भी दबाव में है। कच्चे माल की कमी से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। दूसरी ओर, कंडोम निर्यात के मामले में थाईलैंड दुनिया में सबसे आगे है। वहां प्राकृतिक रबर (लेटेक्स) की भरपूर उपलब्धता होने से उत्पादन लागत कम रहती है। थाईलैंड में उन्नत मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं, आधुनिक तकनीक और कुशल श्रमिक बड़े पैमाने पर उत्पादन को संभव बनाते हैं। साथ ही, सरकार की नीतियां जैसे टैक्स में छूट और विशेष औद्योगिक क्षेत्र जैसे उद्योग को मजबूत बनाती हैं। यही कारण है कि वहां की कंपनियां वैश्विक बाजार में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। एशिया में कंडोम की खपत सबसे ज्यादा है, जहां चीन लगभग 5.8 अरब यूनिट के साथ सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जबकि भारत दूसरे स्थान पर है। अमेरिका और चीन प्रमुख आयातक देशों में शामिल हैं। भारत में कंडोम उत्पादन का मुख्य केंद्र महाराष्ट्र का औरंगाबाद शहर है, जहां देश की बड़ी कंपनियों का बड़ा हिस्सा स्थित है और इसे इस उद्योग का प्रमुख हब माना जाता है।