बिहार चुनाव को लेकर बयानबाजी शुरू, बढ़ गई है ध्रुवीकरण और हिंसा की आशंका.

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सिटी पोस्ट लाइव : बिहार का चुनावी माहौल बंगाल की तरह गर्म होने की ओर बढ़ रहा है, जहां ध्रुवीकरण, बयानबाजी और हिंसा की आशंका बढ़ रही है. एनडीए नीतीश के नेतृत्व में एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन चिराग और जीतन राम मांझी की महत्वाकांक्षाएं इसे जटिल बना रही हैं. महागठबंधन की एकता भी कन्हैया जैसे नेताओं के प्रति आरजेडी के रवैये से कमजोर हो सकती है. कुल मिलाकर, बिहार 2025 का चुनाव न केवल नीतीश बनाम तेजस्वी की लड़ाई है, बल्कि बंगाल की तरह तीखे सियासी टकराव का मैदान बन सकता है.बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर नेताओं की बयानबाजी से बिहार में पश्चिम बंगाल की तरह तीखी सियासी जंग का माहौल बनता जा रहा है.

बीजेपी और विपक्षी महागठबंधन के बीच तल्खी चरम पर है.चुनाव आयोग के विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) ने बिहार की सियासत में आग में घी का काम किया है. विपक्षी दलों, खासकर आरजेडी और कांग्रेस ने इसे गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के मताधिकार को कमजोर करने की साजिश करार दिया है.पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में हिंसा, धार्मिक ध्रुवीकरण और तीखी बयानबाजी ने माहौल को गर्म कर दिया था. बिहार में भी अब वैसी ही आहट सुनाई दे रही है.विपक्ष ने  पटना में बिहार बंद और चक्का जाम कर  शक्ति प्रदर्शन किया. तेजस्वी ने इसे चुपके से ‘एनआरसी लागू करने की कोशिश’ बताया, जबकि राहुल ने इसे संविधान पर हमला करार दिया.  बीजेपी नेता मंगल पांडेय ने इसे ‘रुटीन प्रक्रिया’ बताकर खारिज किया. यह तकरार बंगाल की तरह ध्रुवीकरण की ओर इशारा करती है, जहां ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच इसी तरह की तीखी बयानबाजी देखी गई थी.

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बीजेपी की रणनीति में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों का मिश्रण साफ दिख रहा है. पार्टी ने माता सीता मंदिर और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दों को उठाकर सवर्ण, ओबीसी और दलित वोटरों को साधने की कोशिश की है. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तेजस्वी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘जंगल राज की वापसी नहीं होने देंगे.’ चिराग पासवान ने सारण और आरा में सभी सीटों पर लड़ने का ऐलान कर जेडीयू को असहज कर दिया है. इन बयानों से एनडीए के भीतर भी तनाव की स्थिति दिखती है, जो बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच की रणनीतिक जंग की याद दिलाती है.

कन्हैया कुमार को राहुल और तेजस्वी के साथ मंच से दूर रखने की घटना ने महागठबंधन में दरार की अटकलों को हवा दी. यह बंगाल की तरह ही गठबंधन की अंदरूनी कलह को दर्शाता है, जहां टीएमसी और वाम दलों के बीच तनाव देखा गया था.सोशल मीडिया पर भी माहौल गर्म है. एक यूजर ने लिखा, ‘बिहार में बीजेपी वोटर लिस्ट के जरिए 20% वोट काटने की कोशिश कर रही है, ताकि बंगाल की तरह सत्ता हथियाए.’ दूसरी ओर, बीजेपी समर्थक इसे विपक्ष की हताशा बता रहे हैं. बिहार में हिंसा और अपराध की घटनाएं, जैसे मरीन ड्राइव पर तेजस्वी के काफिले पर हमला, माहौल को और तनावपूर्ण बना रही हैं.


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