बिहार में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पर सियासी घमासान: तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

Deepak Sharma

तेजस्वी यादव का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप: “वोटर लिस्ट में धांधली की कोशिश”

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित करने की “साजिश” करार दिया है। उन्होंने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि यह सब प्रधानमंत्री और भाजपा के इशारे पर हो रहा है, और इस बार बिहार से “आर-पार की लड़ाई” लड़ी जाएगी।

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तेजस्वी यादव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने एक वीडियो जारी किया, जिसमें एक फ्लाईओवर पर मतदाता सूची के फॉर्म खुले में पड़े हुए दिखाई दे रहे थे। इसके अलावा, उन्होंने एक अखबार की तस्वीर भी प्रस्तुत की, जिसमें देवघर में एक जलेबी वाले के पास ऐसे ही फॉर्म पहुंचने की खबर प्रकाशित हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पटना के गांधी मैदान में भी ये फॉर्म फेंके जा रहे हैं। तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि जब चुनाव आयोग यह दावा कर रहा है कि उसने 70% से अधिक फॉर्म एकत्र कर लिए हैं, तो ऐसे हालात क्यों हैं? उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस स्थिति पर स्पष्टीकरण देना चाहिए, क्योंकि उसके प्रवेश सूची और दस्तावेजों में विरोधाभास दिख रहा है।

तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के सुझावों को भी नहीं माना है और मतदाता सूची में कोई संशोधन नहीं किया है। उन्होंने चुनाव आयोग पर शिकायतों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर अव्यवहारिक टारगेट का दबाव डाला जा रहा है, ताकि गरीब, दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वोटरों के नाम सूची से हटाए जा सकें।

राजद नेता ने संभावित प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “अगर एक प्रतिशत हमारे वोटर्स भी छूट जाएं, वो वोट नहीं दे पाएं तो करीब 7 लाख 90 हजार वोटर्स का वोट कट जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि इसका मतलब है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में लगभग 3,251 मतदाताओं के वोट कट सकते हैं, यदि बिहार में 1% मतदाताओं का भी सत्यापन नहीं हुआ। तेजस्वी ने पिछली बार के विधानसभा चुनावों का हवाला दिया, जहां 52 सीटों पर हार-जीत का अंतर 5,000 वोटों से भी कम था। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से काटे जाएंगे, वे अक्सर वे लोग होंगे जो रोज़गार या अन्य कारणों से बिहार से बाहर रह रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने सवाल किया, “कहीं ये आई-वॉश तो नहीं? कहीं अमित शाह या मोदी जी के कहने पर वोटर्स को क्यों नहीं काटा जा रहा है? क्या इसलिए बिना कंसर्न के ये किया ना रहा है वोटर्स को बिना बताएं?” उन्होंने दृढ़ता से कहा, “आप रोटी छीन सकते हैं, लेकिन वोट का अधिकार नहीं छीन सकते।” यह बयान बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है और आगामी चुनावों में मतदाता सूची का मुद्दा एक महत्वपूर्ण चुनावी हथियार बन सकता है।

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