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आज के डिजिटल युग में हमारे चारों तरफ मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेट की दुनिया है। आज की तेज़ रफ्तार डिजिटल गैजेट्स पर निर्भर हो गया है, वहीं मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जीवन पर इसका गहरा प्रबाव पड़ रहा है। इसी के चलते अब डिजिटल डिटॉक्स’ का चलन तेजी से बढ़ रहा है। आज आपको बताएंगे की डिजिटल डिटॉक्स क्यों जरूरी है? इसके क्या फायदे हैं और इसे अपने जीवन में कैसे अपनाएं?
दरअसल, डिजिटल डिटॉक्स’ का मतलब है कि कुछ समय के लिए डिजिटल गैजेट्स यानी स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट से दूरी बनाए रखना। इसका उद्देश्य वास्तविक दुनिया की गतिविधि में समय बिताना है और अपने आसपास की दुनिया, परिवार और दोस्तों के साथ जुड़ने का मौका देता है। वैसे आज के समय में व्यक्ति औसतन 10 घंटे से ज्यादा स्क्रीन पर समय व्यतीत करते हैं। वहीं, हमारे जिदंगी को पहले से कहीं बेहतर बनाने हैं तो इसके कई सारे फायदे है। जैसे- मेंटल हेल्थ का बेहतर होना, शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होना, एकाग्रता बढ़ना,नींद अच्छी आती है, भावनात्मक संतुलन बढ़ता है और रिश्ते बेहतर और मजबूत होते हैं। बता दें, एलन मस्क, अरमान मलिक और क्रीति कुल्हारी जैसे सफल और अमीर लोग भी इस ट्रेंड को फोलो करते हैं। इन लोगों से हम सीख सकते हैं कि व्यस्त जिदंगी में भी डिजिटल डिट़क्स संभव और फायदेमंद भी है। वहीं, इसे आदत में अपनाने के लिए एक छोटा सा नियम बनाएं। जैसे- फोन को बेडरूम में अपने साथ लेकर न जाएं, हफ्ते में एक दिन को नो स्क्रीन डे बनाएं। डिजिटल डिटॉक्स से कॉन्संट्रेशन भटकता है, नींद कम आती है, अकेलापन बढ़ता है और तनाव भी बढ़ता है।
हालांकि, डिजिटल डिटॉक्स को लेकर The Lancet Psychiatry (2019) की रिसर्च कहती है कि किशोरों में हर दिन 3 से ज्यादा घंटे सोशल मीडिया का उपयोग करने से उदासी और चिंता की दर बढ़ती है। और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 5-17 वर्ष के बच्चों के लिए अधिकतम 2 घंटे स्क्रीन टाइम की सिफारिश की जाती है। इससे अधिक होने पर मोटापा, आंखों की थकान और शारीरिक निष्क्रियता के खतरे बढ़ते हैं।