रक्षाबंधन 2025: जानिए क्यों मनाया जाता है यह पवित्र पर्व और क्या है इसके पीछे की ऐतिहासिक कथा…

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव

भारत में इस साल रक्षा बंधन का त्योहार 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। यह पर्व भाई और बहन के रिश्ते को मजबूत बनाता है। इस दिन भाई अपने बहनों की कलाई पर राखी बांधते हैं। लेकिन रक्षाबंधन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि इसके पीछे एक समृद्ध इतिहास और कई पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हुई हैं। चलिए आपको बताते हैं क्या है इसके पीछे की कथाएं।

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दरअसल,दरअसल रक्षाबंधन का त्योहार हर साल सावन पूर्णिमा के दिन मनाते हैं। पंचांग के अनुसार इस साल रक्षाबंधन शनिवार, 9 अगस्त 2025 को मनाया जा रहा है। इस दिन बहन अपने भाई की हाथ पर राखी बांध कर लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती है। आइए जानते है इसके पीछे की ऐतिहासिक कथाएं।

वेदो के अनुसार ऐसा माना जाता है कि देवताओं और असुरों के बीच हुए युद्ध में इंद्र की विजय के लिए उनकी पत्नी शचि (इंद्राणी) ने एक रक्षासूत्र तैयार किया और युद्ध में जाने से पहले इंद्र की कलाई पर राखी बांधा था। इसी रक्षासूत्र की परंपरा को आज ‘राखी’ के रूप में जानी जाती है।

दूसरी कहानी श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा सबसे पवित्र और भावनात्मक मानी जाती है। कहा जाता है कि एक बार श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध किया था, तब उनकी उंगली कट गई थी। यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। यह प्रेम और स्नेह से भरा प्यार श्रीकृष्ण को बहुत प्रिय लगा। उन्होंने बदले में वचन दिया कि जब भी द्रौपदी पर कोई संकट आएगा, वे उसकी रक्षा करेंगे। इस वचन को श्रीकृष्ण ने उस समय निभाया जब द्रौपदी चीरहरण के समय दु:शासन के हाथों अपमानित हो रही थीं। श्रीकृष्ण ने अपनी कृपा से उसकी साड़ी को अंतहीन कर दिया और उसकी लाज बचाई।

तीसरी कहानी है चितौड़ की रानी कर्णावती ने बहादुर शाह के आक्रमण से अपने राज्य की रक्षा के लिए मुग़ल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी थी। यह राखी भाईचारे और सहायता की भावना का प्रतीक बनी। रानी ने हुमायूं को अपना भाई मानते हुए उससे रक्षा की गुहार लगाई। हुमायूं ने राखी का सम्मान करते हुए मदद का वचन दिया, लेकिन वह समय पर चित्तौड़ नहीं पहुंच सका। इसके बावजूद, यह घटना भारतीय इतिहास में राखी के पवित्र बंधन और वीरता का एक अनोखा उदाहरण मानी जाती है।

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