आनंद मोहन ने कर दिया है बड़ा दावा-NDA के साथ मुकेश सहनी की डील पक्की.

City Post Live

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन ने मुकेश सहनी के साथ NDA की डील फाइनल हो जाने का दावा कर दिया है.आनंद मोहन ने कहा कि NDA की जीत पक्की करने के लिए मल्लाहों का साथ बेहद जरुरी है.गौरतलब है मुकेश सहनी को NDA में लाने का चिराग पासवान विरोध कर रहे हैं लेकिन आनंद मोहन का कहना है कि चिराग से ज्यादा जरुरी NDA के लिए मुकेश सहनी हैं.आनंद मोहन के अनुसार लोक सभा चुनाव में मुकेश सहनी के महागठबंधन के साथ होने से NDA की चुनौती बढ़ गई थी.

बिहार की राजनीति में निषाद समुदाय (मल्लाह, बिंद और अन्य मछुआरा जातियां) एक उभरती हुई सियासी शक्ति है. 2023 की बिहार जाति जनगणना के अनुसार, निषाद समुदाय की आबादी करीब 5.5% है जो इसे अति पिछड़ा वर्ग (EBC) की एक प्रभावशाली उपजाति बनाती है. हालांकि, जातिगत आंकड़ों के लिहाज से मल्लाहों का प्रतिशत 2.6 है, वहीं निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, कश्यप जैसे सभी जल-आधारित पेशों से जुड़ी उपजातियों को मिलाकर इसे 8 से 9 प्रतिशत कहा जाता है, जिसे एक व्यापक ‘निषाद समाज’ के रूप में प्रस्तुत किया जाता है. निषादों का प्रभाव खासकर उन क्षेत्रों में है जहां नदियां और मछली पालन उनकी आजीविका का आधार हैं. यह समुदाय अपनी एकजुटता और वोटिंग पैटर्न के लिए जाना जाता है जो किसी भी गठबंधन के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है.

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

निषाद आबादी का कुल प्रतिशत- अब जब जातिगत आथार पर राजनीतिक समीकरण की बात हो रही है तो इसको आंकड़ों में भी समझते हैं. जाति जनगणना 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में निषाद समुदाय की आबादी लगभग 5.5% है. हालांकि, यह संख्या यादव (14%) या मुस्लिम (16%) की तुलना में कम है, लेकिन उनकी एकजुटता और क्षेत्रीय प्रभाव उन्हें महत्वपूर्ण बनाता है. निषादों का वोट बैंक खासकर उन सीटों पर निर्णायक है जहां उनकी आबादी 15-20% से अधिक है. यह समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा होने के कारण नीतीश कुमार की EBC नीतियों और BJP की सामाजिक इंजीनियरिंग का हिस्सा रहा है.

ऐसे तो निषाद समुदाय बिहार के अधिकांश जिले में कुछ न कुछ भागीदारी रखता है, लेकिन इनका प्रभाव मुख्य रूप से उत्तर और पूर्वी बिहार के जिलों में है. मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, भागलपुर और खगड़िया जैसे जिलों में नदियों के किनारे बसी निषाद बस्तियां सियासी समीकरण तय करती हैं. विधानसभा सीटों की बात करें तो हाजीपुर, महाराजगंज, सुगौली, कल्याणपुर और बरारी जैसी सीटों पर निषाद वोटरों का दबदबा है. वर्ष 2020 के चुनाव में निषादों की पार्टी कही जाने वाली विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने चार सीटों पर जीत प्राप्त की थी जो उनकी बढ़ती ताकत का सबूत है. माना जा रहा है कि वर्ष 2025 के चुनाव में इन सीटों पर निषाद वोटर फिर से निर्णायक हो सकते हैं. बिहार की सत्ता की दौड़ में अहम खिलाड़ी निषाद पार्टी ने 2020 के चुनाव में रानीगंज, जाले, मुरलीगंज और सिमरी बख्तियारपुर सीटों पर जीत हासिल की थी.2025 के चुनाव में भी इन सीटों पर निषाद वोटरों की भूमिका अहम रहेगी, खासकर एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर में.

Share This Article