मोतिहारी में स्कूल मरम्मत घोटाला: करोड़ों का खेल, डीईओ कार्यालय पर सवाल

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के मोतिहारी जिले में सरकारी स्कूलों की मरम्मत के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, जिले के संग्रामपुर और तुरकौलिया प्रखंडों में बिना कोई काम किए ही कागजों पर करोड़ों रुपये की राशि निकाल ली गई है। इस घोटाले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, ठेकेदारों और इंजीनियरों की मिलीभगत का आरोप लग रहा है, और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले को दबाने की कोशिश हो रही है।

संग्रामपुर में ₹1.5 करोड़ का घोटाला

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मीडिया में खुलासा होने के बाद पता चला है कि सिर्फ संग्रामपुर प्रखंड में ही 30-35 स्कूलों की मरम्मत के नाम पर ₹1.5 करोड़ से अधिक की राशि का हेरफेर किया गया है। लेकिन जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय ने मामले को रफा-दफा करने के लिए केवल 4 स्कूलों की जांच के आदेश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम को भी इस मामले में शांत रहने को कहा गया है। यह कार्रवाई डीईओ कार्यालय की मंशा पर गंभीर सवाल उठाती है, क्योंकि 35 स्कूलों के घोटाले की जांच सिर्फ 4 स्कूलों तक सीमित कर दी गई है।

तुरकौलिया में भी ₹1 करोड़ का डाका

संग्रामपुर के अलावा, सदर अनुमंडल के तुरकौलिया प्रखंड में भी लगभग 25-30 स्कूलों में मरम्मत के नाम पर लगभग ₹1 करोड़ से अधिक की राशि निकाल ली गई है। इन स्कूलों में भी जमीन पर कोई काम नहीं हुआ है। ऐसा लगता है कि यह भ्रष्टाचार जिले के कई प्रखंडों में फैला हुआ है, और इसकी व्यापक जांच की आवश्यकता है। जल्द ही उन सभी स्कूलों के नाम सार्वजनिक किए जाने की संभावना है, जहां बिना काम किए ही पैसे निकाल लिए गए हैं।

डीईओ कार्यालय पर लगे गंभीर आरोप

जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय पर इस घोटाले को दबाने का आरोप लग रहा है। इस मामले का खुलासा होने के बाद, रातों-रात कुछ स्कूलों में पत्थर, बालू और अन्य निर्माण सामग्री गिराकर काम की खानापूर्ति करने की कोशिश की गई है। जब कुछ हेडमास्टरों से इस बारे में पूछा गया, तो वे हैरान रह गए और उन्होंने पुष्टि की कि उनके स्कूलों में कोई काम नहीं हुआ है, जबकि उन्हें बताया गया कि उनके स्कूलों के लिए सामान गिराया गया है।

अरेराज एसडीओ ने लिया एक्शन

जबकि डीईओ कार्यालय जांच के नाम पर खानापूर्ति कर रहा था, अरेराज अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) ने इस मामले में बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने संग्रामपुर प्रखंड में बिना काम के पैसे निकालने की खबरों पर तुरंत संज्ञान लेते हुए एक तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है। इस टीम को पांच बिंदुओं पर जांच करने और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। एसडीओ ने अपने आदेश में कहा है कि विभिन्न समाचार माध्यमों से उन्हें यह सूचना मिली है कि कई स्कूलों में बिना काम के ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया है, जो एक गंभीर अनियमितता है।

जांच टीम के पांच प्रमुख बिंदु

अरेराज एसडीओ द्वारा गठित टीम को पांच बिंदुओं पर जांच करनी है:

  1. उन सभी स्कूलों का भौतिक निरीक्षण करना जहां बिना काम के भुगतान की खबर है।
  2. निरीक्षण के दौरान स्कूल के प्रधानाध्यापक और प्रबंधन समिति के सदस्यों से लिखित बयान लेना।
  3. विद्यालय की वास्तविक स्थिति की फोटोग्राफिक प्रमाण के साथ रिपोर्ट संलग्न करना।
  4. आंशिक कार्य पाए जाने पर इसका स्पष्ट विवरण देना।
  5. यदि किसी स्कूल में बिना काम के भुगतान की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करना और उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करना।

यह जांच इस पूरे घोटाले की परतें खोलने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस बड़े घोटाले में सर्व शिक्षा अभियान और स्थापना के डीपीओ से लेकर जेई और एई तक के अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

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