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भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने बिहार की राजनीति में एक बड़ा बयान देकर हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया है कि बिहार की करीब 70 विधानसभा सीटों पर राजपूत समाज के लोग या तो जीत सकते हैं या फिर किसी उम्मीदवार को जीत दिला सकते हैं। रूडी ने कहा कि बिहार में राजपूत समाज को एक गारेंटर की तलाश थी, जो उन्हें ‘सांगा यात्रा’ के बाद मिल गया है।
समाज को मिली नई पहचान
राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि सांगा यात्रा ने राजपूत समाज को एक नई पहचान दी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस यात्रा के बाद बिहार में समाज का कोई ‘गारेंटर’ नहीं था, जो अब मिल गया है। यह बयान बिना किसी का नाम लिए दिया गया, लेकिन इसका सीधा संकेत बिहार की राजनीति में राजपूतों की बढ़ती भूमिका की ओर है।
जनसंख्या और चुनावी ताकत
रूडी ने बताया कि बिहार में राजपूतों की आबादी करीब 3.5% है, जो संख्या में 40 से 50 लाख के बीच है। उन्होंने कहा कि यह संख्या भारत के सात राज्यों की पूरी आबादी से भी ज्यादा है। यह आंकड़ा देते हुए उन्होंने साफ संकेत दिया कि बिहार में राजपूत समाज अब कोई छोटी इकाई नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही है, और यह सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन में एक नया दबाव बना सकता है।
नीतीश और तेजस्वी पर भी साधा निशाना
राजीव प्रताप रूडी ने सिर्फ अपनी बात नहीं रखी, बल्कि बिहार की राजनीति के दो सबसे बड़े चेहरों, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव, पर भी अपनी राय दी। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि “नीतीश में बिहार के लोगों की आस्था है; सीएम थे, सीएम हैं और सीएम रहेंगे।” हालांकि, उन्होंने तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि “अगर तेजस्वी अपने पिता (लालू प्रसाद) जैसा नहीं बन सके तो जीत नहीं सकते।”
अहंकारी बताए गए निशिकांत दुबे
अपने ही साथी सांसद, निशिकांत दुबे पर बोलते हुए रूडी ने उन्हें “अहंकारी” बताया और कहा कि वे उनकी “सरकार” का हिस्सा नहीं हैं। यह बयान भाजपा के भीतर संभावित मतभेदों की ओर भी इशारा करता है।
कुल मिलाकर, राजीव प्रताप रूडी का यह बयान बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय खोलता है, जहां वे राजपूत समाज के एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभर रहे हैं और आगामी चुनाव में इस समुदाय की भूमिका को लेकर बड़ा दावा कर रहे हैं।