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नेपाल में हालिया राजनीतिक उथलपुथल और जनआंदोलन के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने वाली कार्की को जन आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभा रहे छात्र संगठनों ने चुना। इन्हीं प्रदर्शनों के दबाव में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। कार्की के पद ग्रहण के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं और नेपाल की जनता की शांति, प्रगति और समृद्धि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “नेपाल की अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री के रूप में पद ग्रहण करने पर मैं माननीय श्रीमती सुशीला कार्की को अपनी शुभकामनाएं देता हूं। भारत नेपाल की जनता की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।” भारत के विदेश मंत्रालय ने भी शुक्रवार देर रात जारी बयान में नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन का स्वागत किया। मंत्रालय ने कहा कि “भारत एक करीबी पड़ोसी, लोकतांत्रिक साझेदार और दीर्घकालिक विकास सहयोगी के रूप में नेपाल के साथ मिलकर कार्य करता रहेगा।”
गौरतलब है कि नेपाल में यह राजनीतिक संकट तब गहराया जब सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुए Gen Z आंदोलन ने भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ व्यापक विरोध में रूप ले लिया। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई में 20 से अधिक छात्रों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हुए। इसके बाद देशभर में हिंसा भड़क गई, जिसमें संसद भवन और नेताओं के घरों में आगजनी की घटनाएं हुईं। सेना की मदद से हालात काबू में लाए गए, लेकिन तब तक 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी थी।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “नेपाल में हुई हिंसा हृदयविदारक है। युवाओं की मौत से दुखी हूं। नेपाल की स्थिरता, शांति और समृद्धि हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”