कैलाश विजयवर्गीय के राहुल-प्रियंका पर बयान से बवाल, कांग्रेस ने कहा- ‘पवित्र रिश्ते का अपमान’

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
मध्य प्रदेश के शहरी विकास मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के सार्वजनिक स्नेह पर टिप्पणी करके एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विजयवर्गीय ने नवरात्रि के पावन अवसर पर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का अपमान किया है।

विजयवर्गीय शाजापुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। मंच पर जाने से पहले उन्होंने राजराजेश्वरी माता मंदिर में पूजा-अर्चना की।

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क्या कहा कैलाश विजयवर्गीय ने?

अपनी वाक्पटुता और सांस्कृतिक दावों से ओत-प्रोत भाषण में विजयवर्गीय ने कहा, “हम पुरानी संस्कृति के लोग हैं। हमारे यहां बहन के गांव में हम पानी तक नहीं पीते। मेरे पिताजी जीरापुर में, जहां मेरी बुआ रहती थीं, घर से पानी का लोटा लेकर जाते थे।” इसके बाद उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, “आज हमारे विपक्ष के नेता ऐसे हैं कि वह अपनी छोटी बहन को चौराहे पर चूमते हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं, आप में से कौन अपनी छोटी बहन या बेटी को सार्वजनिक रूप से चूमता है? यह संस्कारों की कमी है। ये विदेशी संस्कार हैं, विदेश में पले-बढ़े हैं। ये तो प्रधानमंत्री तक को ‘तू’ करके संबोधित करते हैं।”

मंत्री की यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से राहुल गांधी पर एक कटाक्ष थी, जिन्हें अक्सर सार्वजनिक रैलियों और कार्यक्रमों में अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को गले लगाते या स्नेह से माथे पर चूमते हुए देखा जाता है।

विजयवर्गीय ने अपने बयान पर कायम रहते हुए आगे कहा, “इसमें उनकी (राहुल गांधी की) गलती नहीं है। विपक्ष के नेता ने विदेश में पढ़ाई की और वहां के संस्कार ले आए। वह भारतीय परंपराओं को नहीं समझते। वह तो प्रधानमंत्री को भी ‘तू’ कहकर संबोधित करते हैं।”

कांग्रेस का तीखा पलटवार

विजयवर्गीय की इस टिप्पणी पर कांग्रेस ने कड़ी निंदा की। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता पर हमला बोलते हुए कहा: “कैलाश विजयवर्गीय ने मां दुर्गा की पूजा के त्योहार नवरात्रि को भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का अपमान करने के लिए चुना है। उनकी भाषा को हर कोई जानता है। उन्होंने बार-बार महिलाओं का अपमान किया है, कभी उनके कपड़ों को लेकर, कभी उनकी शिक्षा को लेकर, तो कभी उनके बोलने के तरीके को लेकर। यह उनकी सोच है बहनों और बेटियों के बारे में। सच कहूं तो मुझे ऐसे बेशर्म बयान का जवाब देते हुए भी शर्म आ रही है।”

यह विवाद एक बार फिर कैलाश विजयवर्गीय को चर्चा के केंद्र में ले आया है। वह अपनी भड़काऊ बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। आलोचकों ने मंत्री पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की सीमा पार करके व्यक्तिगत और सांस्कृतिक हमलों का आरोप लगाया है। यह घटना भारतीय राजनीति में सार्वजनिक बयानों के गिरते स्तर पर एक बार फिर बहस छेड़ सकती है।

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