बिहार विधानसभा चुनाव 2025: तेज प्रताप ने ‘जनशक्ति जनता दल’ के साथ भरी हुंकार, चुनाव चिह्न ‘ब्लैकबोर्ड’

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की सियासत में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व राज्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ (Jan Shakti Janata Dal) का ऐलान कर दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब उन्हें हाल ही में राजद से निष्कासित किया गया था, और यह बिहार की राजनीति में एक लंबे संघर्ष की शुरुआत का संकेत है।

शुक्रवार को तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी नई पार्टी का पोस्टर साझा किया, जिसमें उन्होंने खुद को “राष्ट्रीय अध्यक्ष” के रूप में दर्शाया है। इस पोस्टर में पार्टी के चुनाव चिह्न “ब्लैकबोर्ड” को भी प्रमुखता से दिखाया गया है। उन्होंने लिखा कि उनकी पार्टी बिहार के संपूर्ण विकास और व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाने के लिए पूरी तरह समर्पित और तत्पर है, जिसके लिए वे एक लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। यह नई पार्टी, तेज प्रताप के अगस्त में पांच छोटे दलों के गठबंधन बनाने के दावे के बाद अस्तित्व में आई है।

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लालू परिवार में बढ़ी सियासी तनातनी:

तेज प्रताप यादव का यह कदम लालू परिवार में बढ़ती सियासी तनातनी को और गहरा करता है। इसी बीच, लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी सोशल मीडिया पर अपने पिता लालू प्रसाद यादव, भाई तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, तथा बहन मीसा भारती (जोकि एक लोकसभा सदस्य हैं) को अनफॉलो कर दिया है। यह विवाद कथित तौर पर तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले और राज्यसभा सांसद संजय यादव को लेकर शुरू हुआ था।

माना जा रहा है कि रोहिणी आचार्य आगामी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन तेजस्वी यादव ने उन्हें ‘ठेंगा दिखा दिया’ यानी चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया। रोहिणी के इस सोशल मीडिया कदम को परिवार के भीतर चल रहे मतभेद और सत्ता की महत्वाकांक्षाओं की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।

राजद के लिए नई चुनौती:

तेज प्रताप यादव के राजद से अलग होकर नई पार्टी बनाने और उसका चुनाव चिह्न जारी करने से राजद की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भले ही तेज प्रताप का जनाधार उनके भाई तेजस्वी जितना व्यापक न हो, लेकिन लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे होने के नाते वे कुछ हजार वोटों का भी बंटवारा करने में सफल रहे तो यह राजद के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, खासकर उन सीटों पर जहां जीत का अंतर बहुत कम होता है।

बिहार विधानसभा चुनाव इसी साल अक्टूबर-नवंबर में होने की संभावना है, और चुनाव आयोग 6 अक्टूबर के बाद कभी भी तारीखों का ऐलान कर सकता है। ऐसे में ‘जनशक्ति जनता दल’ का गठन और लालू परिवार में यह अंदरूनी कलह बिहार के सियासी परिदृश्य को एक नया मोड़ दे सकता है।

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