बिहार चुनाव: प्रशांत किशोर बने बीजेपी के लिए चुनौती? अमित शाह ने बनाया खास ‘साइलेंट’ रणनीति प्लान

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (पीके) एक महत्वपूर्ण फैक्टर के रूप में उभरे हैं। उनकी नई पार्टी जनसुराज इस बार चुनावी मैदान में है और पीके लगातार महागठबंधन और एनडीए दोनों पर ही आक्रामक हमला कर रहे हैं। उनके निशाने पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी हैं।

पीके ने हाल ही में मंगल पांडेय और सम्राट चौधरी जैसे बड़े बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले अशोक चौधरी को भी ऐसे ही गंभीर आरोपों में घेरा है। प्रशांत किशोर के ये तीखे हमले और उनकी बढ़ती लोकप्रियता अब बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

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युवा वोटर्स का रुझान पीके की ओर:

कई चुनावी सर्वे और मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि बिहार का युवा वोटर्स का एक बड़ा हिस्सा पीके की ओर आकर्षित हो रहा है। प्रशांत किशोर लगातार पूरे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं और उन्होंने जनता के बीच एक मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

बीजेपी ने अब तक सार्वजनिक तौर पर प्रशांत किशोर के आरोपों को केवल पब्लिसिटी स्टंट करार दिया है, लेकिन पार्टी आलाकमान चुनाव में इसके संभावित असर को गंभीरता से समझ रहा है।

अमित शाह का ‘मास्टर प्लान’:

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने हालिया बिहार दौरे में प्रशांत किशोर से निपटने की खास रणनीति पर चर्चा की है। इस रणनीति को ‘साइलेंट प्लान’ का नाम दिया गया है।

बीजेपी की रणनीति यह है कि सार्वजनिक मंचों या मीडिया के सामने पीके को अधिक प्रमुखता नहीं दी जाएगी। उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया जाएगा, ताकि वे अनावश्यक रूप से राजनीतिक बहस के केंद्र में न आएं। इसके बजाय, पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि पीके के संभावित चुनावी असर को देखते हुए जमीन पर और बूथ स्तर पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए।

खासकर युवाओं के बीच उनके बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए बीजेपी कई नुक्कड़ और चुनावी सभाएं आयोजित करने की तैयारी में है, ताकि युवा वोटर्स को सीधे पार्टी से जोड़ा जा सके।

जमीनी फीडबैक और नीतीश की छवि पर फोकस:

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीजेपी हाईकमान ने चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर सर्वे और फीडबैक का काम शुरू कर दिया है। लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर निष्पक्ष तरीके से यह फीडबैक लिया जा रहा है कि प्रशांत किशोर की जमीन पर कितनी ‘हवा’ है।

अब तक मिले फीडबैक में यह बताया गया है कि पीके निश्चित रूप से एक फैक्टर हैं, लेकिन बीजेपी हाईकमान आश्वस्त है कि एनडीए गठबंधन अपने संगठनात्मक कौशल और मजबूत प्रचार अभियान के दम पर उनके वोट बैंक में सेंध लगाने से रोकने में कामयाब हो सकता है।

बीजेपी हाईकमान ने कार्यकर्ताओं को यह भी निर्देश दिया है कि पीके के आक्रामक हमलों के बीच जनता के बीच नीतीश कुमार की छवि को मजबूती देने का काम जारी रखा जाए। इसके लिए बूथ स्तर से प्रचार अभियान की सघन निगरानी का निर्देश दिया गया है। कुल मिलाकर, बीजेपी पीके को सार्वजनिक बहस में शामिल न करके, सीधे जमीनी स्तर पर संगठन और विकास के दम पर उनकी चुनौती का सामना करने की तैयारी में है।

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