पटना समेत बिहार के कई जिलों में HIV संक्रमण एक बार फिर चिंता बढ़ा रहा है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ इस साल पटना में ही 1,000 से ज़्यादा नए मरीज सामने आए हैं। बिहार एड्स कंट्रोल सोसाइटी के अनुसार 2025 में अब तक पटना में 1,200 नए HIV-पॉजिटिव केस दर्ज हुए हैं, जबकि पूर्वी चंपारण में 400 से अधिक और पश्चिमी चंपारण में 340 नए मामले मिले हैं। लगातार बढ़ रहे इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि केवल पटना जिले में कुल संक्रमितों की संख्या अब 7,900 के पार पहुंच चुकी है।
मीडिया द्वारा संपर्क किए जाने पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान केवल बिहार एड्स कंट्रोल सोसाइटी ही दे सकती है। वहीं, जारी आंकड़ों से पता चलता है कि पटना में ART (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) पर कुल 7,923 मरीज जीवन-रक्षक दवाइयों पर निर्भर हैं। इनमें से 4,705 मरीज PMCH, 3,091 RMRI और 127 नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज में इलाज करा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी चंपारण में 6,827, मधुबनी में 5,685, गया में 5,529, मुजफ्फरपुर में 5,289 और सीतामढ़ी में 4,958 HIV पॉजिटिव मरीज ART ट्रीटमेंट पर हैं। अधिकारियों का कहना है कि ICTC (इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर्स) में मिले हर पॉजिटिव केस को 100 प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने के लिए ART सेंटर्स तक रेफर किया जाता है।
HIV पॉजिटिव मामलों में तेजी के पीछे चार प्रमुख कारण जिम्मेदार माने जाते हैं, असुरक्षित यौन संबंध बनाना, इंजेक्शन के दौरान संक्रमित सुई का इस्तेमाल, संक्रमित खून चढ़ाना और गर्भावस्था या प्रसव के दौरान मां से बच्चे में संक्रमण। इसके साथ ही सरकार बिहार शताब्दी एड्स रोगी कल्याण योजना और परवरिश योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के जरिए HIV संक्रमित और प्रभावित परिवारों को वित्तीय मदद भी प्रदान कर रही है।