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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़हरा विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के साथ 38 वर्षों से जुड़े रहे वरिष्ठ नेता और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सूर्यभान सिंह ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी है। उन्होंने अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। वे 17 अक्टूबर को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे, जो कि नामांकन की अंतिम तिथि भी है। इससे ठीक पहले वह पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से औपचारिक इस्तीफा देंगे।
सूर्यभान सिंह का यह फैसला बड़हरा की राजनीतिक समीकरणों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है और स्थानीय स्तर पर BJP के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है। बड़हरा विधानसभा सीट वर्तमान में NDA के पास है और BJP ने यहां से मौजूदा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह को ही दोबारा अपना उम्मीदवार बनाया है।
उपेक्षा से आहत, जनसेवा के लिए स्वतंत्र मैदान में
पार्टी छोड़ने के अपने कड़े फैसले के पीछे सूर्यभान सिंह ने नेतृत्व द्वारा की गई लगातार ‘उपेक्षा’ को मुख्य कारण बताया है। उन्होंने भावुक लहजे में कहा कि “भाजपा मेरी मां के समान है, लेकिन उपेक्षा से आहत हूं। अब जनसेवा के लिए स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरना होगा।” उन्होंने बताया कि वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से प्रेरित होकर 1987 में BJP से जुड़े थे और अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा संगठन को मजबूत करने में लगा दिया।
सिंह ने अपने जनसेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान 13,364 घरों में राशन वितरित किया, सामूहिक विवाह आयोजित कराए और जनता के बीच हमेशा सक्रिय रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि उन्हें पार्टी का टिकट मिला होता तो वह निश्चित रूप से 60,000 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल करते। उन्होंने केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह को अपना अभिभावक बताते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
NDA की आंतरिक एकता पर सवाल
सूर्यभान सिंह के निर्दलीय उतरने के फैसले से बड़हरा सीट पर सीधा-सीधा वोट विभाजन होने की आशंका है। 2020 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर BJP को 46.15% वोट शेयर मिला था, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सरोज यादव दूसरे स्थान पर रही थीं। सिंह का चुनावी मैदान में उतरना सीधे तौर पर भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकता है, जिसका फायदा विपक्षी दलों को मिल सकता है।
स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं में भी टिकट वितरण को लेकर गहरी निराशा है। सोशल मीडिया पर कई कार्यकर्ताओं ने उन्हें टिकट न मिलने पर रोष व्यक्त किया है, और कुछ ने तो उन्हें जनसुराज पार्टी से उम्मीदवार बनाए जाने की मांग भी की है। यह घटनाक्रम बिहार चुनाव से ठीक पहले NDA की आंतरिक एकता पर भी सवाल खड़े कर रहा है, खासकर तब जब हाल ही में सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर असंतोष की खबरें सामने आई थीं।
बिहार विधानसभा चुनाव के तहत नामांकन की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर है। बड़हरा सहित अन्य सीटों पर मतदान 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होगा। चुनाव आयोग के अनुसार बड़हरा विधानसभा क्षेत्र में कुल 3.14 लाख मतदाता हैं, और सूर्यभान सिंह का यह कदम यहां के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है। पार्टी ने अभी तक इस घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।