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बिहार की राजनीति में बदलाव की नई बयार बनकर उभरी हैं पुष्पम प्रिया चौधरी, जिन्होंने 2020 में ‘प्लुरल्स पार्टी’ की स्थापना कर राज्य की पारंपरिक जातिधर्म आधारित राजनीति को चुनौती दी। अब एक बार फिर, वे 2025 के विधानसभा चुनावों में नई रणनीति और संकल्प के साथ चुनाव मैदान में हैं।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और ससेक्स विश्वविद्यालय से पढ़ीं पुष्पम प्रिया ने अपनी शिक्षा के बाद बिहार लौटकर राजनीति में कदम रखा। वे दरभंगा से जेडीयू के पूर्व विधायक विनोद कुमार चौधरी की बेटी हैं और उनके दादा प्रो. उमाकांत चौधरी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं।
2020 में चुनावी राजनीति में पदार्पण करते हुए उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था और सभी प्रमुख अखबारों में विज्ञापन देकर जनता के बीच अपनी पहचान बनाई थी। उस चुनाव में हालांकि उनकी पार्टी सिर्फ 148 सीटों पर ही उम्मीदवार खड़ा कर सकी थी, पर इस बार प्लुरल्स पार्टी सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही है। इनमें आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं, जो एक साहसिक और समावेशी कदम है।
उनकी पार्टी को ‘सीटी’ चुनाव चिन्ह मिला है। इस बार भी वे दरभंगा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं। उनका कहना है कि वे धर्म और जाति से ऊपर उठकर केवल “बिहार” के नाम पर राजनीति करना चाहती हैं। उनके अनुसार, “प्लुरल्स का अर्थ है कि सभी वर्गों और समुदायों के लोग मिलकर शासन करें।”
पुष्पम प्रिया की पहचान उनके पूरे काले परिधान और चेहरे पर मास्क से बनी हुई है। वे कहती हैं कि, “मैं तभी अपना मास्क उतारूंगी, जब मैं जीतूंगी।” उन्होंने सफेद वस्त्रों को लेकर भी सवाल उठाए और कहा, “मुझे नहीं पता कि राजनेता सफेद क्यों पहनते हैं, मैं काला इसलिए पहनती हूं क्योंकि यह सच्चाई और विरोध का प्रतीक है।”
राजनीति में अपने विचारों और दृष्टिकोण से पुष्पम प्रिया युवा मतदाताओं के बीच खासा आकर्षण पैदा कर रही हैं। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और समानता पर आधारित शासन की वकालत कर रही हैं। अब देखना यह है कि 2025 के इस चुनाव में बिहार की जनता उन्हें कितना समर्थन देती है।