सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का सियासी पारा चढ़ चुका है, लेकिन इस चुनावी समर में एक बार फिर ‘बाहुबल’ की गूंज सुनाई दे रही है। कई दिग्गज बाहुबली नेता कानूनी अड़चनों के चलते चुनाव मैदान से दूर हैं, पर उनकी राजनीतिक विरासत उनके परिवार के सदस्यों के कंधों पर टिकी है। इन ‘दबंग’ परिवारों का दबदबा कुछ विशेष सीटों पर इतना गहरा है कि पार्टियां आपराधिक रिकॉर्ड से ऊपर उनकी ‘जीतने की क्षमता’ को प्राथमिकता दे रही हैं।
दुलारचंद हत्याकांड में मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह की हालिया गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में ‘बाहुबलियों के दबदबे’ की बहस को फिर से तेज कर दिया है। एडीआर (ADR) की रिपोर्ट बताती है कि इस बार 243 सीटों पर हो रहे घमासान में 22 से अधिक बाहुबली या उनके परिजन ताल ठोक रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 47% उम्मीदवारों पर आपराधिक केस दर्ज हैं, जिनमें से 27% हत्या और रंगदारी जैसे गंभीर मामलों से जुड़े हैं। सत्ताधारी JDU हो या विपक्षी RJD, सभी ने इन परिवारों को टिकट देने में कोई संकोच नहीं किया है।
जेल से संचालित हो रही चुनावी रणनीति: विरासत के दावेदार
इस बार चुनावी रणभूमि में उन दबंगों के वारिसों की जंग देखने को मिल रही है, जिनके मुखिया कानूनी कारणों से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन जेल से ही अपनी राजनीतिक बिसात बिछा रहे हैं।
लालगंज: मुन्ना शुक्ला परिवार की लंदन-रिटर्न बेटी मैदान में बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में सजायाफ्ता मुन्ना शुक्ला (वैशाली) फिलहाल भागलपुर जेल में हैं, पर उनकी 28 वर्षीया बेटी शिवानी शुक्ला (LLM, यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, लंदन) RJD टिकट पर लालगंज से मैदान में हैं। भूमिहार वोटबैंक पर मजबूत पकड़ के कारण RJD ने उन पर दांव लगाया है। चुनावी प्रचार के दौरान हत्या की धमकी मिलने पर शिवानी का तीखा बयान, “एक खरोंच भी आई तो छोड़ूंगी नहीं,” उनकी दबंग विरासत की झलक दिखाता है।
रघुनाथपुर: शहाबुद्दीन की ‘छाया’ में ओसामा शहाबुद्दीन सिवान के दिवंगत बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाबुद्दीन RJD के टिकट पर रघुनाथपुर (सिवान) से चुनावी डेब्यू कर रहे हैं। स्वयं 5 आपराधिक केसों का सामना कर रहे ओसामा के जरिए RJD, मुस्लिम-यादव समीकरण (MY) को मजबूत करने की कोशिश में है। तेजस्वी इसे ‘विरासत’ बता रहे हैं, जबकि अमित शाह ने RJD पर बिहार की सुरक्षा खतरे में डालने का तंज कसा है।
मोकामा: सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी हत्या के मामले में चुनाव लड़ने से वंचित मोकामा के दिग्गज बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी RJD टिकट पर मोकामा से मैदान में हैं। उनका सीधा मुकाबला JDU के बाहुबली अनंत सिंह से है, जिससे 90 के दशक की पुरानी राजनीतिक दुश्मनी फिर ताजा हो गई है।
दबंग जो स्वयं चुनावी रिंग में हैं
कुछ बाहुबली कानूनी अड़चनों से बचते हुए या उनके बावजूद खुद चुनावी मैदान में उतरकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं:
मोकामा के ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह: JDU टिकट पर मोकामा से लड़ रहे अनंत सिंह (‘छोटे सरकार’) पर 28 से अधिक आपराधिक केस दर्ज हैं। AK-47 बरामदगी के बाद UAPA के तहत जेल गए अनंत सिंह रिहा होने के बाद, ₹37.88 करोड़ की संपत्ति के साथ, RJD की वीणा देवी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
दानापुर से रितलाल यादव और कुचायकोट से पप्पू पांडेय: दानापुर से RJD के रितलाल यादव (30+ गंभीर केस) जेल में रहकर चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं कुचायकोट से JDU के अमरेंद्र कुमार पांडेय (पप्पू पांडेय) (14 केस) भी मैदान में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाहुबली परिवारों का यह वर्चस्व आज भी जातिगत समीकरणों पर टिका है। सत्ता के दावेदार जीतने की क्षमता को आपराधिक रिकॉर्ड से ऊपर रख रहे हैं। बिहार की जनता इस बार दबंगता और विकास के बीच किसे चुनेगी, इसका फैसला 10 नवंबर को मतगणना के दिन होगा।