PK की ‘शर्त वाली’ मुलाकात, घर छोड़कर सारी संपत्ति ‘जन सुराज’ को दान

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर (पीके) ने अब पूरी तरह ‘मिशन मोड’ में लौटने का ऐलान किया है। चंपारण के गांधी आश्रम में 24 घंटे का प्रायश्चित उपवास पूरा करने के बाद पीके ने न सिर्फ पार्टी के पुनर्गठन की बात कही, बल्कि एक ऐसा बड़ा और साहसी निर्णय लिया है जिसने बिहार के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

प्रशांत किशोर ने घोषणा की कि वे दिल्ली में अपने परिवार के लिए एक घर छोड़कर अपनी 20 साल की कमाई से अर्जित पूरी चल-अचल संपत्ति जन सुराज पार्टी को दान कर देंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने संकल्प लिया कि अगले पाँच वर्षों में वे जो भी कमाई करेंगे, उसका कम-से-कम 90 प्रतिशत हिस्सा भी पार्टी के संघर्षपूर्ण राजनीतिक यात्रा को मजबूती देने के लिए समर्पित करेंगे।

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‘सिर्फ पैसे देने वाले से करूंगा मुलाकात’
पीके ने पार्टी को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत करने, जनसंपर्क को अधिक व्यापक बनाने और राजनीतिक यात्रा को जारी रखने के लिए संसाधन और पैसों की जरूरत होती है। इसलिए, उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे साल में कम से कम 1000 रुपये का दान देकर जन सुराज को मजबूत करें।

उन्होंने साफ ऐलान किया, “अब वे सिर्फ उसी व्यक्ति से मुलाकात करेंगे, जो जन सुराज को कम से कम 1000 रुपये का सहयोग करेगा।” उनके इस बयान को संगठन के लिए फंड जुटाने और पार्टी कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों के बीच पारदर्शिता और प्रतिबद्धता स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

15 जनवरी से ‘वार्ड अभियान’ की नई शुरुआत
चुनाव परिणाम निराशाजनक रहे, लेकिन प्रशांत किशोर ने कहा कि इससे उनके उत्साह और संकल्प में कोई कमी नहीं आई है। हार को जनता का संदेश मानते हुए उन्होंने 15 जनवरी से बिहार में नए सिरे से एक व्यापक अभियान की शुरुआत करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि जन सुराज के कार्यकर्ता अब राज्य के सभी 1,18,000 वार्डों में जाएंगे और सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ जैसे प्रमुख वादों के वास्तविक क्रियान्वयन की स्थिति पर जनता के बीच काम करेंगे।

महिला रोजगार योजना बनी नया मिशन
प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं को ₹10,000 देने के समय कोई शर्त नहीं रखी थी, लेकिन ₹2 लाख देने के लिए ऐसी शर्तें जोड़ दी गई हैं जिन्हें पूरा करना आम महिलाओं के लिए बेहद मुश्किल है।

पीके ने घोषणा की कि जन सुराज का नया मिशन यह होगा कि कार्यकर्ता हर गांव और वार्ड में जाकर महिलाओं की ओर से आवश्यक फॉर्म भरवाकर जमा करेंगे ताकि या तो उन्हें ₹2 लाख की राशि मिले, या उन्हें यह सीख मिल जाए कि भविष्य में किस तरह गलत चुनावी वादों और पैसे के बदले वोट बेचने की प्रवृत्ति से बचना है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव से जुड़ा है।

प्रशांत किशोर के त्याग, पारदर्शिता और संघर्ष की राह पर चलने के इस फैसले ने बिहार की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है, और आने वाले दिनों में जन सुराज को नई ऊर्जा और संकल्प के साथ देखा जाएगा।

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