क्यों चर्चा में हैं ख्याति सिंह? बिहार के मेगा पॉलिटिकल प्रोग्राम का किया आगाज़…

Ritu Raj

बिहार की 18वीं विधानसभा के पहले सत्र में जहां नए विधायकों की शपथ ने राजनीतिक हलचल तेज की, वहीं इस पूरे कार्यक्रम में एक नाम लगातार चर्चा में रहा, वो है बिहार विधानसभा की प्रभारी सचिव ख्याति सिंह। प्रदेश के इस सबसे बड़े राजनीतिक आयोजन की शुरुआत कराने वाली ख्याति सिंह ने शपथ प्रक्रिया को सधे हुए अंदाज़ में आगे बढ़ाया और पूरे सत्र का संचालन सुचारू रखा। आखिर कौन हैं ख्याति सिंह, जिनकी मौजूदगी पहले दिन की सबसे बड़ी सुर्खी बन गई?

बिहार न्यायिक सेवा की अधिकारी ख्याति सिंह वर्तमान में बिहार विधान परिषद में प्रभारी सचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। उनका न्यायिक करियर 9 अक्टूबर 2007 से शुरू होता है, जब वे बीपीएससी के 26वें बैच के माध्यम से बिहार अधीनस्थ न्यायिक सेवा में शामिल हुईं। बीए, एलएलबी और पीजीडीएलपीएम की शैक्षिक पृष्ठभूमि रखने वाली ख्याति सिंह ने न्यायपालिका की कई महत्वपूर्ण चुनौतियों वाले पदों पर काम किया है। वहीं, 10 जुलाई 1974 को जन्मी ख्याति सिंह 31 जुलाई 2034 को सेवा निवृत्त होंगी। अपने करियर के दौरान वे राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल में आयोजित सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के लिए राष्ट्रीय अभिविन्यास कार्यक्रम में भी प्रशिक्षित हुईं,जो न्यायिक क्षमता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए प्रतिष्ठित माना जाता है। पटना, समस्तीपुर, मोतिहारी, पटना सिटी, नवादा और शेखपुरा सहित कई जिलों में उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट, सब जज, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश और विशेष उत्पाद शुल्क न्यायालय की पीठासीन अधिकारी जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। आज, बिहार विधान परिषद में प्रभारी सचिव के पद पर उनकी भूमिका प्रशासनिक कुशलता और अनुभव का संतुलित उदाहरण मानी जा रही है।

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

न्यायिक सेवा में अपनी लंबी यात्रा के दौरान ख्याति सिंह ने हर पद पर दक्षता और संतुलन का अलग ही उदाहरण पेश किया। विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाने के बाद उन्होंने विधि अधिकारी, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश और विशेष उत्पाद शुल्क न्यायालय की पीठासीन अधिकारी जैसी भूमिकाएँ संभालकर अपनी प्रशासनिक क्षमता भी साबित की। अब बिहार विधान परिषद में प्रभारी सचिव के रूप में उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में नई विधानसभा की शुरुआत हो रही है। शपथ ग्रहण जैसे बड़े संवैधानिक आयोजन को सफलता पूर्वक संचालित कर उन्होंने न सिर्फ अपनी प्रशासनिक समझ का परिचय दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि वे विधायी प्रक्रिया के हर चरण को उतनी ही सटीकता से निभाती हैं जितनी न्यायिक दायित्वों को निभाते हुए निभाई है।

Share This Article