नरेंद्र मोदी : ‘बाबासाहेब की दूरदर्शी सोच ने देश को दिशा दी’, PM मोदी से लेकर राहुल गांधी तक ने किया याद

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
भारत के संविधान निर्माता, सामाजिक न्याय के अग्रदूत और दबे-कुचलों को आवाज देने वाले महानायक डॉ. भीमराव अंबेडकर को आज उनके महापरिनिर्वाण दिवस (6 दिसंबर) पर कृतज्ञ राष्ट्र श्रद्धापूर्वक नमन कर रहा है। बाबासाहेब के भागीरथ प्रयासों से ही देश के दलितों, पिछड़ों और वंचितों को उनका संवैधानिक अधिकार और सम्मान मिल पाया। इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य सभी प्रमुख राजनीतिक हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

पीएम मोदी ने बताया दूरदर्शी सोच का मार्गदर्शक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि महापरिनिर्वाण दिवस पर वे बाबासाहेब की दूरदर्शी सोच, न्याय और समानता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता तथा संवैधानिक मूल्यों को याद करते हैं, जिसने भारत की विकास यात्रा को एक सही दिशा दी है।

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प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि अंबेडकर ने न केवल अपने समय के लोगों को, बल्कि पीढ़ियों को मानव गरिमा और लोकतांत्रिक आदर्शों को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। पीएम मोदी ने कामना की कि बाबासाहेब के आदर्श एक विकसित भारत के निर्माण में आगे भी देश का मार्ग रोशन करते रहें।

राष्ट्रपति मुर्मू ने अर्पित की पुष्पांजलि
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर पहुंचकर डॉ. बीआर अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट से जारी संदेश में बताया गया कि राष्ट्रपति ने श्रद्धा और सम्मान के साथ बाबासाहेब को नमन किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि अंबेडकर की शिक्षाएं और उनका संघर्ष भारत को एक न्यायपूर्ण और समानता-आधारित समाज बनाने की दिशा में आज भी हमारा मार्गदर्शन करता है।

राहुल गांधी ने कहा- विरासत संविधान की रक्षा का संकल्प मजबूत करती है
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी बाबासाहेब अंबेडकर को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी।

राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा, “महापरिनिर्वाण दिवस पर बाबा साहेब आंबेडकर को विनम्र श्रद्धांजलि। समानता, न्याय और मानव सम्मान की उनकी अमर विरासत मुझे संविधान की रक्षा के संकल्प को और मजबूत करती है और हमें एक अधिक समावेशी और संवेदनशील भारत के लिए प्रेरित करती है।” यह बयान देश में संविधान के मूल्यों को सुरक्षित रखने के प्रति विपक्ष की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

क्या है महापरिनिर्वाण दिवस का महत्व?
हर वर्ष 6 दिसंबर को यह दिन संविधान निर्माता, सामाजिक न्याय के अग्रदूत और आधुनिक भारत के महान विचारक डॉ. अंबेडकर को याद करने के लिए मनाया जाता है। डॉ. अंबेडकर का निधन 6 दिसंबर 1956 को हुआ था। 1956 में ही उन्होंने हिंदू धर्म की कुरीतियों और सामाजिक असमानताओं से दुखी होकर बौद्ध धर्म अपनाया था।

बौद्ध दर्शन के अनुसार, परिनिर्वाण का अर्थ है मृत्यु के बाद पूर्ण मुक्ति प्राप्त करना, अर्थात सभी इच्छाओं, मोह-माया और सांसारिक बंधनों से पूरी तरह मुक्त हो जाना। बौद्ध धर्म में इसे सर्वोच्च अवस्था माना जाता है, जो सदाचार और अनुशासित जीवन से प्राप्त होती है। यह दिवस हमें बाबासाहेब के आदर्शों, उनके संघर्ष और देश के लिए उनके योगदान को याद करने का अवसर देता है।

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