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संसद के शीतकालीन सत्र के समापन के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी चुनावी रणनीति में तेज़ी लाते हुए पूर्वी और दक्षिणी भारत पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। पार्टी के नेतृत्व ने 2026 के चुनावों में राष्ट्रीय विस्तार और निर्णायक बढ़त प्राप्त करने के लिए एक त्रि-स्तरीय रणनीति तैयार की है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन और गृहमंत्री अमित शाह की भूमिका प्रमुख होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वी भारत में अपने दौरे की शुरुआत की है, जहां वे 20 और 21 दिसंबर को पश्चिम बंगाल और असम में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। पश्चिम बंगाल में मोदी सरकार द्वारा 3200 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की शुरुआत के साथ-साथ चुनावी माहौल बनाने के लिए जनसभाओं का भी आयोजन किया जाएगा। मोदी अगले दो महीनों में बंगाल में 7 से 8 सभाओं को संबोधित करेंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य विकास बनाम तुष्टिकरण का नैरेटिव तैयार करना है।
असम में, मोदी ने गोपीनाथ बरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन किया, साथ ही असम वैली फर्टिलाइजर और केमिकल कंपनी लिमिटेड की अमोनिया-यूरिया परियोजना का भूमि पूजन भी प्रस्तावित है। इन कार्यक्रमों को राज्य में विकास और अस्मिता से जोड़ने की राजनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, खासकर जब अगले साल असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं।
दूसरी ओर, नितिन नबीन, जो बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं, दक्षिण भारत में संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। उनके पहले दौरे में पुडुचेरी और चेन्नई शामिल हैं, जहां वह संगठनात्मक समीक्षा, चुनावी तैयारियों और कैडर से संवाद करेंगे। उनके साथ केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया भी मौजूद रहेंगे, जो सरकार और संगठन के बीच समन्वय का संकेत देते हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी 29-30 दिसंबर को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का दौरा प्रस्तावित है, जहां वह चुनावी रणनीति और प्रबंधन पर विशेष ध्यान देंगे। बीजेपी की यह त्रिस्तरीय रणनीति साफ तौर पर यह संकेत देती है कि पार्टी अब राज्यों के चुनावों को राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक दृष्टिकोण से देख रही है।