मकर संक्रांति हिंदुओं का एक प्रमुख और आस्था से भरा त्योहार है, जिसकी तैयारियां पूरे देश और विशेषकर बिहार में बड़े ही उत्साह के साथ की जा रही हैं। बिहार की संस्कृति में इस दिन दही-चूड़ा और तिलकुट के भोजन का विशेष महत्व है। यह पर्व न केवल स्वाद का है, बल्कि यह खरमास की समाप्ति और सभी शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक भी है।
हाल के वर्षों में मकर संक्रांति की तिथि को लेकर 14 और 15 जनवरी के बीच संशय बना रहता है। आइए जानते हैं इस वर्ष की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व के बारे में:
तिथि का संशय और ज्योतिषीय गणना:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस क्षण सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, उसे ही मकर संक्रांति कहा जाता है। इस वर्ष की स्थिति इस प्रकार है:
– सूर्य का प्रवेश: पटना के प्रसिद्ध पंडित अशोक द्विवेदी के अनुसार, महावीर, ऋषिकेश और मिथिला पंचांगों की गणना कहती है कि सूर्य 14 जनवरी की रात्रि 9:19 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
– उदया तिथि का महत्व: चूँकि सूर्य का प्रवेश रात में हो रहा है और रात में स्नान-दान का विधान नहीं है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाना शास्त्रसम्मत और लाभकारी है।
शुभ मुहूर्त (15 जनवरी, 2026):
| विशेष काल | समय |
| पुण्यकाल की समाप्ति | दोपहर 1:19 बजे तक |
| विशेष शुभ मुहूर्त (कुंभ लग्न) | सुबह 8:31 से 10:02 तक |
क्या दान करें?
इस दिन अपनी राशि के दोषों को दूर करने और पुण्य कमाने के लिए इन चीजों का दान करें:
– काला तिल और गुड़ (शनि और सूर्य की कृपा के लिए)।
– ऊनी कपड़े और काला कंबल (जरूरतमंदों की सहायता)।
– धार्मिक पुस्तक या पंचांग।
– दही-चूड़ा और खिचड़ी का भोजन कराना।