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बिहार की सियासत में मकर संक्रांति का त्योहार केवल तिल-गुड़ और दही-चूड़ा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बड़े राजनीतिक उलटफेर का केंद्र बन गया है। सोमवार को पटना के सदाकत आश्रम (कांग्रेस मुख्यालय) में आयोजित दही-चूड़ा भोज ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस द्वारा आयोजित इस भोज से पार्टी के सभी 6 विधायक नदारद रहे, जिसके बाद महागठबंधन के भीतर टूट की अटकलें तेज हो गई हैं।
सदाकत आश्रम में सूनापन, विधायकों की रहस्यमयी दूरी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने बड़े उत्साह के साथ इस भोज का आयोजन किया था, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। लेकिन सबकी नजरें उन 6 विधायकों पर टिकी थीं, जो इस आयोजन में नहीं पहुंचे। हालांकि, पार्टी की ओर से दलील दी गई कि विधायक निजी कारणों से नहीं आ सके, लेकिन सियासी गलियारों में इसे ‘ऑपरेशन लोटस’ या पाला बदलने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
JDU का खुला दांव: “हमारे दरवाजे सबके लिए खुले हैं”
कांग्रेस विधायकों की इस अनुपस्थिति पर सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने तुरंत अपनी चाल चल दी है। बिहार सरकार के मंत्री जमा खान ने विधायकों को खुला ऑफर देते हुए कहा, “नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करने की इच्छा रखने वालों के लिए जेडीयू के दरवाजे हमेशा खुले हैं। अगर कांग्रेस विधायक हमारे पास आते हैं, तो हम बाहें फैलाकर उनका स्वागत करेंगे।” इस बयान ने विपक्षी खेमे में बेचैनी बढ़ा दी है।
BJP और चिराग पासवान की पैनी नजर
वहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय जायसवाल ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस एक डूबती हुई नाव है। उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के विदेश दौरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब नेता ही गायब हैं, तो विधायकों का मोहभंग होना स्वाभाविक है। दूसरी ओर, लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी दावा किया है कि विपक्ष के कई विधायक उनके संपर्क में हैं और बिहार में कभी भी बड़ा राजनीतिक धमाका हो सकता है।