पटना में नीट तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बुधवार (21 जनवरी 2026) को आरजेडी सांसद मनोज झा ने इस घटना को “ओपन एंड शट केस” करार देते हुए कहा कि कोई बड़ा रसूखदार व्यक्ति इसमें शामिल होने के कारण बच रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए पूछा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के बड़े-बड़े दावों के बीच एक शब्द भी क्यों नहीं बोला गया? मनोज झा ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार में ऐसे मामले पहले भी दबाए गए हैं, लेकिन अब विपक्ष चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने तेजस्वी यादव के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को 100 दिन का समय दिया गया है, उसके बाद सवाल-जवाब शुरू होंगे।
हालांकि, इस पर बीजेपी ने पलटवार किया। प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि आरजेडी को ऐसे मुद्दों पर बोलने का कोई हक नहीं है, क्योंकि उनके शासनकाल में महिलाओं पर अत्याचार के सैकड़ों मामले थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान सरकार ने तुरंत कार्रवाई की है—उच्च अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच चल रही है, पूर्व बयान देने वाले डॉक्टर की समीक्षा हो रही है। सरावगी ने आश्वासन दिया कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के गृह विभाग के अधीन किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
गौरतलब है कि यह मामला 6 जनवरी को पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा के बेहोश मिलने से शुरू हुआ था। वह जहानाबाद की रहने वाली थी और नीट की तैयारी कर रही थी। कई दिनों कोमा में रहने के बाद 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में यौन हिंसा की आशंका जताई गई, जबकि शुरुआत में पुलिस ने इसे सुसाइड बताया था। अब एसआईटी जांच कर रही है, हॉस्टल सील किया गया है, कुछ संदिग्ध हिरासत में हैं, और महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है। परिवार ने यौन शोषण का आरोप लगाया है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ी हुई है।