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मायानगरी मुम्बई में ‘बिहार भवन’ के निर्माण को लेकर सियासत का पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और शिवसेना (यूबीटी) द्वारा इस प्रोजेक्ट के कड़े विरोध के बीच बिहार सरकार ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने विरोधियों को दो-टूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि यह भवन हर हाल में बनेगा और इसे रोकने की शक्ति किसी में नहीं है।
विवाद की जड़: 314 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट
बिहार कैबिनेट ने मुम्बई में बिहार भवन के निर्माण के लिए 314.20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। यह भवन दक्षिण मुम्बई के एल्फिंस्टन इस्टेट में मुम्बई पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर प्रस्तावित है। 30 मंजिला इस आधुनिक इमारत की ऊँचाई लगभग 69 मीटर होगी, जिसमें 178 कमरों के साथ अत्याधुनिक सुविधाएँ होंगी।
मंत्री अशोक चौधरी का तीखा हमला
मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, “मुम्बई किसी की जागीर नहीं है। हुल्लड़बाजी करने वाले जान लें कि बिहार भवन का निर्माण होकर रहेगा। किसी के बाप में दम नहीं है जो इसे रोक सके।” उन्होंने राज ठाकरे के बयानों को ‘फालतू’ करार देते हुए सवाल किया कि क्या महाराष्ट्र में राजतंत्र चल रहा है या लोकतंत्र?
कैंसर मरीजों के लिए बनेगा सहारा
इस भवन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक है। मुम्बई में टाटा मेमोरियल जैसे अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले बिहार के गरीब कैंसर मरीजों और उनके परिजनों के लिए यहाँ 240 बेड का विशेष छात्रावास बनाया जाएगा। वर्तमान में मरीजों को मुम्बई की सड़कों या महंगे होटलों में शरण लेनी पड़ती है, जिसे देखते हुए बिहार सरकार ने यह संवेदनशील फैसला लिया है।
मनसे और शिवसेना का तर्क
उद्धव ठाकरे गुट और मनसे का आरोप है कि क्षेत्रीय राजनीति के तहत मुम्बई की कीमती जमीन को हथियाने की कोशिश हो रही है। विनायक राउत जैसे नेताओं का तर्क है कि यह भविष्य में अन्य राज्यों के भवनों की होड़ शुरू कर देगा। हालाँकि, जानकारों का कहना है कि नवी मुम्बई में पहले से ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों के भवन मौजूद हैं, ऐसे में सिर्फ बिहार भवन का विरोध करना राजनीतिक द्वेष प्रतीत होता है।
दक्षिण मुंबई में प्रस्तावित यह 30 मंजिला अत्याधुनिक बिहार भवन 69 मीटर ऊँचा होगा। इसमें अधिकारियों के लिए 178 कमरों के साथ मरीजों के परिजनों हेतु विशाल छात्रावास बनेगा, जो प्रवासियों की सहायता करने और राज्य में निवेश को बढ़ावा देने का कार्य करेगा।