बिहार की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पटना हाईकोर्ट ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के 42 विधायकों के खिलाफ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इन विधायकों पर चुनाव के दौरान ‘वोट चोरी’ करने और नामांकन के समय चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
प्रमुख नाम जो रडार पर हैं;
प्रेम कुमार: विधानसभा अध्यक्ष
विजेंद्र यादव: ऊर्जा मंत्री
जीवेश मिश्रा: पूर्व मंत्री
चेतन आनंद: विधायक
अमरेंद्र प्रसाद: राजद विधायक (गोह)
क्या है पूरा मामला?
14 नवंबर 2025 को आए बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में NDA ने भारी जीत दर्ज की थी। हालांकि, चुनाव परिणाम आने के बाद कई क्षेत्रों में हारे हुए प्रत्याशियों ने परिणामों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ताओं के मुख्य आरोप;
तथ्यों को छुपाना: नामांकन के वक्त दाखिल शपथ पत्र (Affidavit) में संपत्ति, आपराधिक रिकॉर्ड या अन्य जानकारी गलत दी गई।
चुनावी अनियमितता: मतदान और मतगणना की प्रक्रिया में धांधली या ‘वोट चोरी’ की शिकायत।
भ्रामक जानकारी: जानबूझकर चुनाव आयोग को अंधेरे में रखने का प्रयास।
कोर्ट की कार्यवाही और अगला कदम;
गुरुवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान, अदालत ने इन आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर माना। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित विधायकों को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष और स्पष्टीकरण दाखिल करना होगा। भविष्य की सुनवाई इन विधायकों द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर तय होगी। बता दें कि यदि चुनावी हलफनामे में जानकारी गलत पाई जाती है, तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत संबंधित विधायक की सदस्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है।