सिटी पोस्ट लाइव
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ को लेकर देशव्यापी विरोध अब और तेज हो गया है। इस विवाद में अब मशहूर कवि और प्रखर वक्ता कुमार विश्वास की भी एंट्री हो गई है। कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया के जरिए बेहद तीखे अंदाज में अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने एक पुरानी कविता की पंक्तियों का सहारा लेते हुए केंद्र सरकार के नए नियमों पर कड़ा प्रहार किया है, जिससे इंटरनेट पर नई बहस छिड़ गई है।
“मैं अभागा सवर्ण हूं…”
कुमार विश्वास ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर दिवंगत कवि रमेश रंजन मिश्रा की पंक्तियों को साझा किया। उन्होंने लिखा, “चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा सवर्ण हूं मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा।” इस पोस्ट के साथ उन्होंने #UGC_RollBack हैशटैग का इस्तेमाल कर साफ कर दिया कि वह इन नियमों को वापस लेने की मांग का समर्थन कर रहे हैं। उनकी इस पोस्ट को सवर्ण समाज के युवाओं द्वारा बड़े पैमाने पर साझा किया जा रहा है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके तहत हर संस्थान में एक ‘समानता समिति’ का गठन होना है। विरोध कर रहे संगठनों का तर्क है कि इन नियमों में आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC) के लिए तो कड़े प्रावधान और अनिवार्य प्रतिनिधित्व तय किया गया है, लेकिन सामान्य वर्ग (General Category) के हितों और उनके प्रतिनिधित्व को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। लोगों का मानना है कि इससे शैक्षणिक संस्थानों में संतुलन बिगड़ सकता है।
प्रशासनिक हलकों में भी बगावत: सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा
यह विवाद केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। हाल ही में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। हालांकि, बाद में सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। अग्निहोत्री ने खुलेआम ब्राह्मण और अन्य सवर्ण प्रतिनिधियों से अपील की थी कि वे सत्ता का मोह छोड़कर अपने समाज के साथ खड़े हों। उन्होंने दावा किया कि इन नियमों के कारण सामान्य वर्ग के लोग केंद्र और राज्य सरकार से लगातार दूरी बना रहे हैं।
फिलहाल, कुमार विश्वास की इस कविता ने आग में घी डालने का काम किया है। अब देखना यह होगा कि क्या बढ़ते दबाव के बीच UGC अपनी गाइडलाइंस में कोई संशोधन करती है या विरोध का यह स्वर और मुखर होगा।