सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजधानी समेत पूरे राज्य में शिक्षा ग्रहण कर रही छात्राओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस मुख्यालय ने ‘आर-पार’ की जंग छेड़ दी है। हालिया घटनाओं से सबक लेते हुए अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के कमजोर वर्ग प्रभाग ने 4 फरवरी 2026 को राज्य के सभी जिलों के लिए एक सख्त गाइडलाइन जारी की है। अब राज्य के किसी भी कोने में बिना रजिस्ट्रेशन और पुलिस वेरिफिकेशन के गर्ल्स हॉस्टल या लॉज चलाना जेल की हवा खिला सकता है।
रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, महिला हेल्प डेस्क रखेगी नजर
नए फरमान के अनुसार, प्रत्येक गर्ल्स हॉस्टल और लॉज का सक्षम प्राधिकार के पास पंजीकरण कराना अब अनिवार्य होगा। स्थानीय थानों में एक विशेष ‘हॉस्टल पंजी’ (Register) बनाई जाएगी। इस रजिस्टर को अपडेट रखने और हॉस्टलों की निगरानी करने की पूरी जिम्मेदारी थाने की महिला हेल्प डेस्क की प्रभारी को सौंपी गई है।
कर्मचारियों का होगा ‘करैक्टर सर्टिफिकेट’ टेस्ट
हॉस्टल के भीतर सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए अब गार्ड, रसोइया (कुक) और सफाईकर्मियों समेत सभी स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। बिना आपराधिक रिकॉर्ड की जांच किए किसी भी पुरुष या महिला कर्मचारी को हॉस्टल में नहीं रखा जा सकेगा।
सुरक्षा के हाई-टेक इंतजाम: वॉयस रिकॉर्डिंग CCTV और बायोमेट्रिक
पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा मानकों को आधुनिक बना दिया है। अब हॉस्टल परिसरों में केवल साधारण नहीं, बल्कि वॉयस रिकॉर्डिंग सुविधा वाले एचडी सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य है, जिनका कम से कम 30 दिनों का बैकअप होना चाहिए।
पुरुषों का प्रवेश वर्जित: हॉस्टल के मुख्य परिसर में पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। परिजनों से मिलने के लिए अलग ‘विजिटर रूम’ बनाना होगा।
आधार लिंक रजिस्टर: हर आने-जाने वाले का विवरण आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के साथ दर्ज किया जाएगा।
हार्डवेयर चेक: कमरों की कुंडी, खिड़कियों पर लोहे की जाली और दरवाजों की मजबूती की जांच खुद ‘अभया ब्रिगेड’ करेगी।
24×7 महिला वार्डन और ‘अभया ब्रिगेड’ का पहरा
प्रशासनिक स्तर पर, हर हॉस्टल में चौबीसों घंटे एक महिला वार्डन की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा, स्थानीय थानाध्यक्ष और ‘अभया ब्रिगेड’ की टीम प्रतिदिन हॉस्टलों का दौरा करेगी और छात्राओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को जानेगी।
112 ऐप से मिलेगी तुरंत मदद
मुख्यालय ने निर्देश दिया है कि हॉस्टल के नोटिस बोर्ड पर स्थानीय थाना, महिला हेल्पलाइन और आपातकालीन नंबर 112 के पोस्टर लगाए जाएं। छात्राओं को ‘112 India App’ के इस्तेमाल के लिए ट्रेनिंग भी दी जाएगी ताकि संकट के समय एक क्लिक पर पुलिस उन तक पहुंच सके। सभी जिलों के एसपी को आदेश दिया गया है कि वे हर महीने की 15 तारीख तक अनुपालन रिपोर्ट मुख्यालय भेजें।