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बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को विधानसभा परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब ऐतिहासिक भवन की बालकनी के छज्जे का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर पड़ा। यह हादसा उस समय हुआ जब विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) डॉ. प्रेम कुमार सदन की कार्यवाही के लिए प्रवेश कर रहे थे। गनीमत रही कि मलबे की जद में कोई नहीं आया और स्पीकर बाल-बाल बच गए, वरना यह एक गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।
लाखों के रिनोवेशन पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि बिहार विधानसभा भवन का अभी कुछ ही महीनों पहले बड़े पैमाने पर रिनोवेशन (जीर्णोद्धार) कार्य कराया गया था। सरकार ने इसके सौंदर्यीकरण और मजबूती के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए थे। रिनोवेशन के इतने कम समय के भीतर छत का हिस्सा गिरना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल हुई सामग्री पर गंभीर सवाल खड़े करता है। घटना के तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों ने उस रास्ते को सील कर दिया और सदस्यों की आवाजाही पर रोक लगा दी।
विपक्ष ने घेरा—’ढह रहा है लोकतंत्र’
इस घटना को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। मौके पर मौजूद पूर्व मंत्री और राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा: “मैं शून्यकाल के प्रश्न जमा करने जा रहा था, तभी अचानक छज्जा गिर गया। कई माननीय सदस्य वहां मौजूद थे। अगर यह मलबा किसी के सिर पर गिरता, तो जान जा सकती थी। भवन निर्माण में भारी लापरवाही हो रही है। जहां हम धरना देते थे, वहां प्रवेश बंद कर दिया गया है और अब तो लगता है कि सरकार की लापरवाही से ‘लोकतंत्र का मंदिर’ ही ढह रहा है।”
जांच की मांग और अफरा-तफरी
घटना के बाद परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। विपक्षी विधायकों ने मांग की है कि रिनोवेशन कराने वाली एजेंसी और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। विधायक कुमार सर्वजीत ने यह भी सवाल उठाया कि अगर यह हिस्सा सदन के भीतर गिरा होता, तो स्थिति कितनी भयावह होती। फिलहाल, भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए गए हैं।