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बिहार विधानसभा के मौजूदा सत्र में ‘तांती-तत्वा’ जाति को अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी से बाहर करने के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि फिलहाल यह जाति एससी की सूची में शामिल नहीं है। यह निर्णय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। इस घोषणा के साथ ही सदन में आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई।
कोर्ट का आदेश और सरकार का रुख
मंत्री विजय चौधरी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि तांती-तत्वा जाति को अनुसूचित जाति की सूची से बाहर करना सरकार का मनमाना फैसला नहीं है, बल्कि यह कदम न्यायिक निर्देशों के तहत उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक और कानूनी बाध्यताओं के कारण वर्तमान में इस जाति के लोगों को अनुसूचित जाति के तहत नए आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा।
नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत
इस विवाद के बीच सरकार ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण देते हुए स्पष्ट किया है कि जो लोग पहले से ही अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ लेकर सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, उनकी नौकरी पर कोई खतरा नहीं है और वे अपनी सेवा के अंत तक पद पर बने रहेंगे क्योंकि यह फैसला केवल भविष्य की नियुक्तियों और आरक्षण श्रेणियों पर ही लागू होगा।
सदन में विधायकों के बीच ‘तू-तू मैं-मैं’
आरक्षण के इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब विधायक आईपी गुप्ता और जदयू विधायक मनीष कुमार के बीच तीखी नोकझोंक हुई। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर राजनीतिक दलीलें पेश कीं, जिससे सदन में काफी देर तक शोरगुल होता रहा। विपक्ष का तर्क था कि इस फैसले से एक बड़े सामाजिक वर्ग के हितों को नुकसान पहुंचेगा।
भविष्य में पुनर्विचार का आश्वासन
हंगामे को शांत करते हुए विजय चौधरी ने कहा कि सरकार इस मुद्दे की संवेदनशीलता को समझती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार सभी कानूनी और संवैधानिक पहलुओं का अध्ययन कर रही है। भविष्य में इस जाति के कल्याण और आरक्षण की स्थिति पर गंभीरता से विचार किया जाएगा, ताकि सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके।