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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी शिकस्त के तीन महीने बाद चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर (PK) एक बार फिर सड़कों पर हैं। चुनावी हार की निराशा को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने पश्चिम चंपारण के बगहा से अपनी नई राज्यव्यापी यात्रा ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ का शंखनाद किया है। इस यात्रा का उद्देश्य न केवल हतोत्साहित कार्यकर्ताओं में जोश भरना है, बल्कि नीतीश सरकार की योजनाओं की खामियों को उजागर कर एक मजबूत दबाव समूह के रूप में उभरना भी है।
गांधी के सत्याग्रह की राह पर पीके
प्रशांत किशोर ने अपनी यात्रा की शुरुआत के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बगहा को चुना, जो महात्मा गांधी के 1917 के चंपारण सत्याग्रह का प्रतीक है। पीके अगले तीन महीनों में बिहार के सभी 38 प्रशासनिक जिलों (जन सुराज के 44 संगठनात्मक जिले) का दौरा करेंगे। इस दौरान वे सीधे कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे और जल्द ही अपनी नई संगठनात्मक टीम की घोषणा भी कर सकते हैं।
चुनावी हार से लिया सबक
हालिया विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी (JSP) ने 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन पार्टी का खाता भी नहीं खुला और 235 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। इस पर आत्ममंथन करते हुए किशोर ने कहा, “चुनाव से पहले हमारी यात्रा उस घोड़े जैसी थी जिसे पता ही नहीं था कि उसे क्या करना है। अब जनता ने हमें सड़क पर उतरकर उनके मुद्दों को उठाने का जनादेश दिया है।”
नीतीश सरकार की योजनाओं की ‘पोल’ खोलने की रणनीति
प्रशांत किशोर ने इस बार नीतीश सरकार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (MMRY) को निशाने पर लिया है।
दबाव की राजनीति: उन्होंने दावा किया कि चुनाव से पूर्व महिलाओं को दिए गए 10,000 रुपये महज एक चुनावी हथकंडा थे। अब वे सरकार पर दबाव बनाएंगे कि प्रत्येक लाभार्थी महिला को वादे के मुताबिक 2 लाख रुपये दिए जाएं।
पेंशन का श्रेय: पीके ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 400 रुपये से बढ़ाकर 1,100 रुपये करने का श्रेय भी जन सुराज के आंदोलनों को दिया।
कानून व्यवस्था और सुरक्षा: उन्होंने पटना में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत का मुद्दा उठाते हुए सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
बेटिया राज की जमीन और किसानों का मुद्दा
यात्रा के दौरान पीके ने स्थानीय किसानों से मुलाकात कर बेटिया राज की जमीन के अधिग्रहण और सरकारी ‘बुलडोजर’ के डर को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेएसपी का लक्ष्य केवल सत्ता पाना नहीं, बल्कि बिहार में एक ईमानदार और जवाबदेह राजनीतिक विकल्प तैयार करना है।
सियासी गलियारों में चर्चा
हार के बाद कुछ समय के लिए शांत रहे प्रशांत किशोर की हाल ही में प्रियंका गांधी वाड्रा से हुई मुलाकात ने भी बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या यह ‘नवनिर्माण अभियान’ 2025 की हार के जख्मों को भरकर जन सुराज को 2030 या भविष्य के चुनावों के लिए एक मजबूत शक्ति बना पाएगा।