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बिहार की राजधानी पटना अब कूड़े के ढेर और बदबू से पूरी तरह मुक्त होने की राह पर है। पटना नगर निगम (PMC) ने शहर की स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने के लिए 53 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत शहर के सभी सर्किलों में अत्याधुनिक गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन (GTS) का निर्माण किया जा रहा है, जो कचरा प्रबंधन के पुराने ढर्रे को पूरी तरह बदल कर रख देगा।
वैज्ञानिक प्रबंधन: कूड़ा नहीं, अब ‘संसाधन’ बनेगा कचरा
ये नए गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन केवल कचरा डंप करने की जगह नहीं होंगे। यहाँ वैज्ञानिक तरीके से कचरे का संग्रहण और प्रोसेसिंग की जाएगी। स्टेशनों के भीतर विशाल शेड, ड्रेनेज सिस्टम और धर्मकांटा (वजन मशीन) लगाए जा रहे हैं। इससे यह सटीक डेटा उपलब्ध होगा कि किस अंचल से प्रतिदिन कितना कचरा निकल रहा है। कचरे से निकलने वाले गंदे पानी (Leachate) को सीधे ड्रेनेज से जोड़ा जाएगा, ताकि सड़कों पर गंदगी न फैले और आसपास के इलाकों में बदबू की समस्या खत्म हो सके।
स्मार्ट मशीनें और तेज ट्रांसपोर्टेशन
परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी आधुनिक मशीनरी है। इन स्टेशनों पर कॉम्पैक्टर यूनिट, हुक लोडर और कैप्सूल कंटेनर तैनात किए जाएंगे। ये मशीनें कचरे को कंप्रेस (संकुचित) कर देंगी, जिससे कम जगह में ज्यादा कचरा ले जाया जा सकेगा। इससे कचरा ढोने वाली गाड़ियों के फेरे कम होंगे और सड़क पर कचरा गिरने की समस्या भी समाप्त हो जाएगी। बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए यहाँ डीजी सेट भी लगाए जा रहे हैं।
निर्माण कार्य की स्थिति: यारपुर में 70% काम पूरा
परियोजना के तहत पटना सिटी क्षेत्र में अकेले 13.97 करोड़ रुपये की लागत से बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। बांकीपुर और पाटलिपुत्र अंचल में भी काम युद्ध स्तर पर जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, यारपुर स्थित स्टेशन का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। जैसे ही ये स्टेशन चालू होंगे, शहर में खुले स्थानों पर मौजूद पुराने कचरा केंद्रों को बंद कर दिया जाएगा, जिससे शहर की सुंदरता में चार चांद लगेंगे।
नगर निगम की इस पहल से न केवल नागरिकों को गंदगी से राहत मिलेगी, बल्कि आने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण में पटना की रैंकिंग में भी जबरदस्त सुधार की उम्मीद है। यह परियोजना राजधानी को ‘स्मार्ट सिटी’ मॉडल के करीब ले जाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।