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नेपाल में चल रहे हिंसक प्रदर्शन के बीच पीएम ओली शर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। आर्मी चीफ ने उन्हें पद छोड़ने का सुझाव दिया था। ऐसे में लोग प्रधानमंत्री के बारे में ज्यादा कुछ जानना चाहते हैं। तो चलिए बताते हैं कैसी पीएम राजनीतिक में एंट्री किए।
नेपाल में सोशल मीडिया बैन के कारण हो रहे हिसंक प्रदर्शन के बीच में ही ओली शर्मा ने प्रधानमंत्री पद से आज यानी 9 सितंबर को इस्तीफा दे दिया है। वहीं, आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिगडेल ने उन्हें पद छोड़ने का सलाह दिया था। दरअसल, केपी शर्मा ओली के जीवन की बात करें तो उनका जन्म 22 फरवरी 1952 को पूर्वी नेपाल के तेरहथुम जिले के इवा नामक एक छोटे से गांव में हुआ था। वह एक साधारण किसान परिवार में पैदा हुए। जब वे मात्र चार साल के थे तभी उनकी मां दुनिया से चल बसीं। बाद में बाढ़ आने की वजह से उनका परिवार झापा के गरमानी में शिफ्ट हो गया। उन्होंने अपनी शिक्षा झापा से ही पूरे किए। और यहां से एसएलसी परीक्षा पास की। हालांकि, उन्होंने स्नातक के फर्स्ट ईयर में ही अपनी पढ़ाई छोड़कर राजनीतिक में एंट्री कर गए। झापा में ओली पंचायत विरोधी और नक्सलबाड़ी आंदोलनों से प्रभावित हुए। वे 1966 के पंचायत विरोधी आंदोलन के दौरान राजनीति की दुनिया में कदम रखा। उसके बाद नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बने और पार्टी में टॉप पर पहुंचे। 1970 के दशक की शुरुआत में उनका राजनीतिक जीवन तेजी से आगे बढ़ा। वे नक्सलवादी आंदोलन से प्रेरित एक उग्र वामपंथी अभियान झापा आंदोलन में हिस्सा लिया। इसके कारण उन्हें 14 साल जेल में काटना पड़ा। इससे उनकी राजनीतिक विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और मज़बूत हुई। साल 2015 में केपी शर्मा ओली नेपाल के पीएम बने। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में ही राष्ट्रीय संप्रभुता और खासतौर पर भारत के साथ संबंधों पर कड़ा रुख अपनाया। साथ में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की शुरुआत की। उनका 2018 का कार्यकाल सबसे सफल रहा। सीपीएन-यूएमएल और माओवादी केंद्र का नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में एकीकरण हुआ। लंबे समय से चली आ रही बिजली कटौती (लोड-शेडिंग) की समस्या का समाधान हुआ। इसके बाद साल 2024 में दोबारा नेपाल के प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ दिन से सोशल मीडिया बैन पर बवाल की वजह से आज उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।
गौरतलब है कि नेपाल में 2 दिनों से जारी हिंसक प्रदर्शन के चलते पीएम ओली शर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। अब तक इस हिंसा में कुल 19 लोग मारे जा चुके हैं। और 400 से ज्यादा लोग घायल हैं।