बिहार विधानमंडल के बजट सत्र का 12वां दिन आरोपों-प्रत्यारोपों और व्यक्तिगत हमलों के नाम रहा। सदन की कार्यवाही के दौरान न केवल नीतिगत मतभेद दिखे, बल्कि मंत्रियों और विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया।
शराबबंदी पर छिड़ा विवाद;
सदन में उस वक्त स्थिति असहज हो गई जब सरकार के एक मंत्री के बयान ने सबको चौंका दिया। मंत्री ने दावा किया कि “सदन के सभी सदस्य शराब पीते हैं।” इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने तत्काल मोर्चा संभाला। उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा- यह कहना कि सभी सदस्य शराब पीते हैं, पूर्णतः गलत और आपत्तिजनक है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शराबबंदी का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था, जिसमें विपक्ष की भी सहमति थी।
अशोक चौधरी का ‘बजट’ प्रहार और वॉकआउट;
ग्रामीण कार्य विभाग के बजट प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मंत्री अशोक चौधरी और विपक्ष के बीच ठन गई। जब विपक्ष के सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए, तब भी मंत्री ने अपना भाषण जारी रखा। उन्होंने सख्त लहजे में कुछ विधायकों (राहुल कुमार, आलोक मेहता, अख्तरुल ईमान आदि) के नाम लेते हुए कहा कि उनके क्षेत्रों में विभाग द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाएगा। इस पर AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने पलटवार करते हुए कहा, “यह लोकतंत्र है, राजतंत्र नहीं। अगर यह बयान गंभीरता से दिया गया है, तो इसका पुरजोर विरोध होगा।”
विधान परिषद में ‘नकली डिग्री’ पर संग्राम;
विवाद की आंच विधान परिषद तक भी पहुँची, जहाँ मंत्री अशोक चौधरी और MLC सुनील सिंह के बीच सीधी भिड़ंत हो गई। सुनील सिंह ने अशोक चौधरी की शैक्षणिक डिग्री को ‘नकली’ बताया। आगबबूला होकर अशोक चौधरी ने चुनौती दी कि या तो सुनील सिंह आरोप साबित करें या इस्तीफा दें। मंत्री विजय चौधरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि बिना साक्ष्यों के आरोप लगाना सदन की गरिमा के खिलाफ है और इसे कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।
तेजस्वी की चोट पर तंज;
विधानसभा में जदयू विधायक विनय चौधरी ने राजद और तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला। तेजस्वी के पैर की चोट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि “जनता ने राजद का इलाज कर दिया है। तेजस्वी यादव सदन में डोलते-डोलते आए थे, जबकि पैर की चोट में ऐसा नहीं होता। हमने मेडिकल जांच की मांग की थी, लेकिन वे भाग गए।”