बिहार राज्यसभा चुनाव: 5 सीटों के लिए बिछी सियासी बिसात, NDA में ‘नंबर गेम’ और दावेदारों की खींचतान तेज

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले आगामी चुनावों ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। एक ओर जहाँ नीट (NEET) छात्रा मौत मामले में पप्पू यादव के हस्तक्षेप और सीबीआई की सक्रियता से माहौल गरमाया हुआ है, वहीं दूसरी ओर उच्च सदन जाने के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति अपने चरम पर है। विधायकों की मौजूदा संख्या बल को देखते हुए एनडीए का पलड़ा भारी नजर आ रहा है, लेकिन पांचवीं सीट को लेकर सस्पेंस बरकरार है।

NDA का गणित: 4 सीटें पक्की, 5वीं पर नजर
बिहार विधानसभा के मौजूदा समीकरणों के अनुसार, भाजपा और जेडीयू के पास क्रमशः 89 और 85 सीटें हैं। एक राज्यसभा उम्मीदवार की जीत के लिए करीब 41-42 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। इस लिहाज से भाजपा और जेडीयू की 2-2 सीटें (कुल 4) सुरक्षित दिख रही हैं।

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

असली पेंच पांचवीं सीट पर फंसा है। यदि एनडीए के सहयोगी दल—चिराग पासवान की एलजेपी (आर), उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम और जीतन राम मांझी की ‘हम’ एक साथ आते हैं, तो उन्हें 5वीं सीट के लिए मात्र 3-4 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। चर्चा है कि चिराग पासवान अपनी माता रीना पासवान के लिए प्रयासरत हैं, वहीं उपेंद्र कुशवाहा अपनी सीट बरकरार रखना चाहते हैं।

नीतीश कुमार का ‘नियम’ और दिग्गजों का भविष्य
जेडीयू में आमतौर पर किसी नेता को दो बार से ज्यादा राज्यसभा नहीं भेजा जाता है (शरद यादव जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर)। ऐसे में रामनाथ ठाकुर और हरिवंश के भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म है:

रामनाथ ठाकुर: कर्पूरी ठाकुर के पुत्र और केंद्र में मंत्री होने के कारण उनके लिए नीतीश कुमार अपने अघोषित नियम में ढील दे सकते हैं।

हरिवंश: राज्यसभा उपसभापति के रूप में उनके कद और भाजपा के साथ उनके बेहतर समन्वय को देखते हुए माना जा रहा है कि भाजपा उनके लिए कोई बीच का रास्ता (जैसे राज्यपाल का पद या भाजपा कोटे से सीट) निकाल सकती है।

महागठबंधन और हिना शहाब का फैक्टर
विपक्ष (RJD, कांग्रेस, वाम दल) के पास कुल 135 विधायक हैं। एक सीट निकालने के लिए उन्हें एआईएमआईएम (5 विधायक) और बसपा (1 विधायक) के साथ-साथ निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत होगी। चर्चा है कि राजद मुस्लिम कार्ड खेलते हुए हिना शहाब को उम्मीदवार बना सकता है, ताकि एआईएमआईएम का समर्थन हासिल किया जा सके। हालांकि, कांग्रेस के कुछ ‘बागी’ विधायकों का रुख आरजेडी की राह मुश्किल कर सकता है।

पप्पू यादव और नीट छात्रा केस का प्रभाव
राजनीति के बीच, पटना में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला भी तूल पकड़ रहा है। पप्पू यादव ने इस मुद्दे पर सरकार और हॉस्टल प्रबंधन को घेरते हुए इसे ‘बड़ा स्कैम’ करार दिया है। सीबीआई की जांच अब हॉस्टल संचालिका और अस्पताल के इर्द-गिर्द घूम रही है, जिससे सत्ता पक्ष पर नैतिक दबाव बढ़ गया है।

Share This Article