सिटी पोस्ट लाइव
पटना के एक निजी हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा जांच की रफ्तार बढ़ाए जाने और सांसद पप्पू यादव के तीखे हमलों ने इस मुद्दे को बिहार की सियासत के केंद्र में ला खड़ा किया है। जहाँ एक ओर जांच एजेंसियां सबूत जुटाने में लगी हैं, वहीं दूसरी ओर ‘न्याय की लड़ाई’ अब राजनीतिक मोड़ ले चुकी है।
जांच का नया केंद्र: ‘ननिहाल कनेक्शन’ और निलंबित पुलिसकर्मी
सीबीआई की टीम ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए जहानाबाद और गया में मृतका के परिजनों से दोबारा पूछताछ की है। इस बार टीम ने छात्रा के मामा और मामी से अलग-अलग बात कर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया।
जांच का एक बड़ा हिस्सा अब पुलिस की कार्यशैली पर भी टिका है। सीबीआई ने कदमकुआं थाने के निलंबित सब-इंस्पेक्टर (SI) हेमंत झा से लंबी पूछताछ की है। ज्ञात हो कि एफएसएल (FSL) रिपोर्ट आने के बाद साक्ष्यों के संकलन में लापरवाही बरतने के आरोप में उन्हें निलंबित किया गया था। जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि छात्रा को अस्पताल पहुँचाने की सूचना सबसे पहले किसने दी और पुलिस ने शुरुआती घंटों में हॉस्टल की तलाशी क्यों नहीं ली?
हॉस्टल और अस्पताल प्रबंधन पर गहराता शक
मृतका के परिजनों ने ‘शंभू गर्ल्स हॉस्टल’ की संचालिका, उनके बेटे और वार्डन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का स्पष्ट कहना है कि “सच्चाई हॉस्टल की चहारदीवारी के भीतर दफन है।” उन्होंने मांग की है कि संचालिका और वार्डन को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जाए।
इसके अलावा, प्रभात मेमोरियल अस्पताल भी अब जांच के घेरे में है। परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान जानबूझकर देरी की गई और यूरिन टेस्ट जैसे महत्वपूर्ण परीक्षण समय पर नहीं कराए गए। परिजनों का दावा है कि अन्य विशेषज्ञों से राय लेने पर ‘गलत इलाज’ की बात सामने आई है, जिससे अस्पताल प्रशासन की भूमिका संदिग्ध हो गई है।
पप्पू यादव का फेसबुक लाइव और तीखे सवाल
इस पूरे मामले ने तब राजनीतिक तूल पकड़ा जब सांसद पप्पू यादव ने फेसबुक लाइव के जरिए पुलिस और प्रशासन पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने सीधे तौर पर पटना एसएसपी (SSP) और एसपी (SP) की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि “अब तक हॉस्टल संचालिका की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?” पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि मामले को ‘आत्महत्या’ बताकर रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। पप्पू यादव की मांग है कि छात्रा की कॉल डिटेल्स (CDR), हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज और केस की मूल डायरी को सार्वजनिक किया जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
फिलहाल, बिहार में इस मामले को लेकर सामाजिक आक्रोश और राजनीतिक दबाव दोनों चरम पर हैं। सीबीआई की अगली कार्रवाई और फॉरेंसिक रिपोर्ट के तकनीकी विश्लेषण पर ही सबकी निगाहें टिकी हैं। क्या यह वाकई आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है, इसका जवाब अब सीबीआई के आधिकारिक निष्कर्ष से ही मिलेगा।