NCERT की किताब पर भड़के CJI: ‘न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत किसी को नहीं’, खुद एक्शन ले सकता है सुप्रीम कोर्ट…

Ritu Raj

NCERT की 8वीं कक्षा की नई किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ के अध्याय को शामिल किए जाने पर देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी;
बुधवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान बेंच ने सख्त लहजे में अपनी बात रखी है। वहीं, CJI सूर्यकांत ने कहा- “किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कानून अपना काम करेगा और कोर्ट इस मामले पर खुद संज्ञान (Suo Motu) लेने पर विचार कर रहा है।” इसके साथ ही जस्टिस बागची ने कहा कि किताब में इस तरह की सामग्री को शामिल करना संविधान के ‘बेसिक स्ट्रक्चर’ (मूल ढांचे) के ही खिलाफ प्रतीत होता है।

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वकीलों की दलीलें;
सीनियर एडवोकेट कपिल सिबल और अभिषेक मनु सिंघवी ने बार एसोसिएशन की चिंताओं को कोर्ट के सामने रखा है। वहीं, सिंघवी ने सवाल उठाया कि क्या भ्रष्टाचार सिर्फ न्यायपालिका में है? ब्यूरोक्रेसी, राजनीति या सार्वजनिक जीवन में होने वाले भ्रष्टाचार पर किताब पूरी तरह मौन है। इस पर सिबल ने भी चिंता जताते हुए कहा कि 8वीं कक्षा के छोटे बच्चों को न्यायिक भ्रष्टाचार पढ़ाना पूरी व्यवस्था के प्रति उनके विश्वास को डगमगा सकता है।

NCERT की नई किताब में क्या है?
केस बैकलॉग (पेंडिंग मामले);-
सुप्रीम कोर्ट: 81 हजार मामले।
हाईकोर्ट: 62.4 लाख मामले।
जिला एवं निचली अदालतें: करीब 4.70 करोड़ मामले।

भ्रष्टाचार और जवाबदेही;
इसमें बताया गया है कि लोग न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार का सामना करते हैं, जिससे गरीबों के लिए न्याय पाना और कठिन हो जाता है। वहीं, CPGRAMS का जिक्र करते हुए बताया गया कि 2017 से 2021 के बीच जजों के खिलाफ 1,600 से अधिक शिकायतें मिलीं।

संवैधानिक प्रक्रिया और पूर्व CJI का संदर्भ;
– किताब में जजों को हटाने की महाभियोग (Impeachment) प्रक्रिया और जजों के ‘कोड ऑफ कंडक्ट’ को समझाया गया है।
– इसमें पूर्व CJI बीआर गवई के जुलाई 2025 के उस बयान को भी उद्धृत किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भ्रष्टाचार से पब्लिक ट्रस्ट कम होता है और इसे पारदर्शिता के जरिए ही ठीक किया जा सकता है।

आगे क्या होगा?
1) चीफ जस्टिस ने कहा है कि वह इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे। फिलहाल कोर्ट ने ‘इंतजार’ करने को कहा है, क्योंकि पूरे देश के हाई कोर्ट 2) जज और न्यायिक हितधारक इस सामग्री से आहत हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्देश या सुधार की प्रक्रिया शुरू होगी।

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