स्टार किड होने के बावजूद नहीं मिला ‘पका-पकाया’ काम; जानिए शाहिद कपूर के फर्श से अर्श तक की कहानी…

Ritu Raj

हिंदी सिनेमा में आज शाहिद कपूर का नाम एक ऐसे कलाकार के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने अपनी वर्सटाइल एक्टिंग और कड़ी मेहनत से खुद को साबित किया है। ‘कबीर सिंह’ का जुनून हो या ‘हैदर’ की गहराई, शाहिद ने हर किरदार में जान फूंकी है। लेकिन चमक-धमक वाली इस मंज़िल के पीछे का रास्ता कांटों भरा था।

टूटा हुआ बचपन और शुरुआती संघर्ष;
शाहिद का जन्म 25 फरवरी, 1981 को दिल्ली में हुआ। पिता पंकज कपूर और माँ नीलिमा अज़ीम जैसे दिग्गज कलाकारों के घर जन्म लेने के बावजूद उनका बचपन किसी आम बच्चे जैसा सरल नहीं था। वहीं, जब शाहिद महज़ 3 साल के थे, उनके माता-पिता अलग हो गए। इस कठिन हालात मेउन्होंने अपनी माँ के साथ किराए के घरों में जीवन बिताया। आर्थिक तंगी और इमोशनल अकेलेपन ने उन्हें उम्र से पहले ही गंभीर और समझदार बना दिया था।

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

जब पहचान बनी ‘बैकग्राउंड डांसर’;
शाहिद के लिए डांस सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का जरिया था। श्यामक डावर से ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने करियर की शुरुआत एक बैकग्राउंड डांसर के तौर पर की। वहीं, वे ‘दिल तो पागल है’ और ‘ताल’ जैसी फिल्मों में भीड़ का हिस्सा बनकर नाचते थे। इसके साथ ही उन्होंने गुज़ारे के लिए छोटे-मोटे विज्ञापनों और म्यूजिक वीडियो में काम किया, जहाँ फीस बेहद कम मिलती थी। ऑडिशन के दिनों में उनके पास अच्छे कपड़े तक नहीं थे। वे दोस्तों से शर्ट मांगकर इंटरव्यू देने जाते थे, जहाँ अक्सर उन्हें यह कहकर निकाल दिया जाता था कि वे “हीरो” जैसे नहीं दिखते।

पिता के नाम का इस्तेमाल नहीं किया;
आमतौर पर स्टार-किड्स के लिए रास्ते खुले होते हैं, लेकिन शाहिद ने कभी अपने पिता पंकज कपूर के रसूख का सहारा नहीं लिया। उन्होंने घंटों प्रोडक्शन ऑफिसों के बाहर इंतज़ार किया और अपमान भी सहा, लेकिन अपनी पहचान खुद बनाने की जिद नहीं छोड़ी।

उतार-चढ़ाव का दौर;
शाहिद के करियर का ग्राफ किसी रोलर-कोस्टर से कम नहीं रहा। लंबे ऑडिशन के बाद ‘इश्क विश्क’ मिली और वे रातों-रात ‘चॉकलेट बॉय’ बन गए। पहली फिल्म के बाद लगातार 6 फिल्में फ्लॉप हुईं। दुनिया ने उन्हें ‘वन फिल्म वंडर’ का टैग दे दिया और शाहिद इतने टूट गए कि उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था। साल 2006 में सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘विवाह’ ने उनके डूबते करियर को सहारा दिया। ‘प्रेम’ के सीधे-सादे किरदार ने दर्शकों का दिल जीत लिया और यहाँ से उनके स्टारडम की दूसरी पारी शुरू हुई।

Share This Article