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बिहार में छोटे उद्योगों और कारोबारियों को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से बिहार ग्रामीण परिवर्तन परियोजना (बीआरटीपी) को ‘जीविका-3’ के नाम से नए स्वरूप में शुरू करने की तैयारी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत आगामी छह वर्षों में कुल 3000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे राज्य में सूक्ष्म, लघु और ग्रामीण उद्योगों को नई दिशा मिलेगी।
जानकारी के अनुसार, परियोजना की अवधि 2026-27 से 2031-32 तक निर्धारित की गई है। चरणबद्ध तरीके से इस पर व्यय किया जाएगा। वर्ष 2026-27 में 300 करोड़ रुपये, 2027-28 में 450 करोड़ रुपये, 2028-29 में 600 करोड़ रुपये, 2029-30 में 900 करोड़ रुपये, 2030-31 में 450 करोड़ रुपये और 2031-32 में 300 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। कुल राशि में से 70 प्रतिशत धनराशि World Bank द्वारा और 30 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाना, आय और रोजगार के अवसर सृजित करना तथा स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है। योजना के तहत गांव स्तर पर गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, सीड प्लांट, प्रोसेसिंग यूनिट, हैचरी और चिलिंग प्लांट जैसी आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जाएगा। साथ ही उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार किया जाएगा, जिससे उद्यमी निजी क्षेत्र के साझेदारों के साथ मिलकर काम कर सकें।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि जीविका-3 के तहत स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों और उत्पादक कंपनियों की क्षमता वृद्धि पर विशेष जोर दिया जाएगा। कृषि, वानिकी, मत्स्य पालन, डेयरी, पॉल्ट्री, मधुमक्खी पालन और गैर-कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा सोलर मार्ट जैसे नवाचारों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगी और छोटे उद्योगों से जुड़े हजारों परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करेगी।