सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करते ही सूबे की सियासत में जुबानी जंग तेज हो गई है। राजद नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को नीतीश कुमार की राजनीतिक विदाई करार देते हुए बीजेपी पर जोरदार हमला बोला है। तेजस्वी ने एक अनोखे मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए कहा कि नीतीश जी के साथ बीजेपी ने खेल कर दिया है।
घोड़ा चढ़ाया, पर फेरे किसी और के साथ
पटना में पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “बीजेपी ने नीतीश जी को दूल्हा बनाकर घोड़े पर तो चढ़ा दिया, लेकिन फेरे किसी और के साथ दिला रही है।” तेजस्वी का इशारा इस ओर था कि बीजेपी ने चुनाव में तो नीतीश के चेहरे का इस्तेमाल किया, लेकिन अब सत्ता की असली चाबी और मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने पास रखने की तैयारी कर ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने मुख्यमंत्री को पूरी तरह ‘हाईजैक’ कर लिया है।
मेरी भविष्यवाणी सच साबित हुई
तेजस्वी यादव ने अपने पुराने दावों को याद दिलाते हुए कहा कि जब 2024 में नीतीश कुमार ने महागठबंधन का साथ छोड़ा था, तभी उन्होंने चेतावनी दी थी कि बीजेपी धीरे-धीरे जेडीयू को खत्म कर देगी। तेजस्वी ने कहा: “मैंने शुरू से कहा था कि विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी नीतीश जी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं रहने देगी। आज मेरी बात सच साबित हो गई। बीजेपी का एजेंडा हमेशा से क्षेत्रीय दलों को निगलने का रहा है और जेडीयू अब उसी रास्ते पर है।”
20 साल के राजनीतिक सफर का ‘दिल्ली’ में पड़ाव
नीतीश कुमार, जो 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले चुके हैं और राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले सीएम हैं, अब दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होंगे। 1985 में विधायक बनने से लेकर 1994 में समता पार्टी के गठन और वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहने तक, उनका सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है।
2005 में पहली बार सत्ता संभालने के बाद उन्होंने कई बार पाला बदला—कभी राजद के साथ गए तो कभी बीजेपी के साथ। हालिया 2025 के चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत दिलाने के बावजूद उनका अचानक राज्यसभा जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। तेजस्वी यादव का मानना है कि यह जनता के जनादेश के साथ धोखा है और बिहार की जनता में इस ‘सत्ता परिवर्तन’ को लेकर भारी आक्रोश है।
अब क्या होगा जेडीयू का भविष्य?
तेजस्वी के इन हमलों ने जेडीयू के भीतर भी बेचैनी बढ़ा दी है। जहाँ नीतीश कुमार इसे अपनी व्यक्तिगत इच्छा (संसद के चारों सदनों का सदस्य बनने की चाहत) बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे बीजेपी के दबाव में किया गया ‘सरेंडर’ मान रहा है। अब देखना यह है कि क्या नीतीश के जाने के बाद जेडीयू का अस्तित्व बना रहता है या वह पूरी तरह बीजेपी के रंग में रंग जाती है।