बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के दौरान अक्सर ‘खेला’ होने की चर्चा रहती है, लेकिन इस बार की पटकथा किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं है। बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए हो रही वोटिंग के बीच सियासी पारा तब चरम पर पहुँच गया, जब महागठबंधन के खेमे से तीन विधायकों के ‘गायब’ होने की खबर आई। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा फारबिसगंज (48) से कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास की हो रही है, जिनका मोबाइल और मौजूदगी दोनों फिलहाल रहस्य बने हुए हैं।

गाड़ी और बॉडीगार्ड घर पर, विधायक नदारद;
विधायक जी के पटना आवास का नजारा किसी रहस्यमयी फिल्म जैसा है। बाहर उनकी BR38AL9857 नंबर वाली गाड़ी खड़ी है, अंदर बॉडीगार्ड और स्टाफ तैनात हैं, लेकिन ‘साहब’ गायब हैं। स्टाफ की चुप्पी और अनभिज्ञता ने इस शक को यकीन में बदल दिया है कि यह सामान्य अनुपस्थिति नहीं, बल्कि सोची-समझी सियासी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

तेजस्वी के ‘खेला’ वाले दावे पर पलटवार?
कुछ समय पहले तक तेजस्वी यादव ‘खेला होने’ की बात कर रहे थे, लेकिन आज की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। महागठबंधन में सेंध में जहाँ AIMIM जैसे दल साथ खड़े दिख रहे हैं, वहीं कांग्रेस और राजद के अपने सिपाही मैदान छोड़ते नजर आ रहे हैं। वोटिंग के ऐन वक्त पर विधायकों का गायब होना विपक्ष की एकजुटता के दावों की हवा निकाल रहा है।

कांग्रेस की गुहार;
कांग्रेस के अंदर इस वक्त भारी बेचैनी है। पोलिंग एजेंट प्रतिमा दास ने तो सरकार से विधायक को ‘खोजकर’ लाने तक की गुहार लगा दी है। पार्टी को डर है कि कहीं ये ‘लापता’ विधायक वोटिंग के समय एनडीए के पाले में न खड़े मिलें। बिहार की राजनीति में ‘गायब’ होने का यह सिलसिला महज इत्तेफाक है या किसी बड़े उलटफेर की आहट, इसका फैसला कुछ ही घंटों में हो जाएगा। फिलहाल, सबकी नजरें इस पर हैं कि क्या मनोज विश्वास वोट डालने विधानसभा पहुँचते हैं या नहीं।