बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह खबर वाकई किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। जहाँ बिजली कंपनियों ने अपनी जेब भरने की तैयारी कर ली थी, वहीं विनियामक आयोग ने उनके प्रस्ताव पर पानी फेरते हुए जनता को बड़ी राहत दी है।
आयोग का फैसला;
बिजली कंपनियों ने 35 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की मांग की थी, जिसे बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया।आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी की अध्यक्षता में हुए इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि 1 अप्रैल से बिहार में बिजली की पुरानी दरें ही प्रभावी रहेंगी।
प्रमुख बदलाव और उनके फायदे;
इस बार आयोग ने न केवल दरों को स्थिर रखा है, बल्कि बिलिंग सिस्टम में भी कुछ क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। ‘वन नेशन, वन रेट’ की तर्ज पर अब शहरी और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें समान होंगी। वहीं, पहले की तरह दो अलग-अलग स्लैब के बजाय अब एक ही स्लैब होगा। इससे बिल की गणना करना आम आदमी के लिए बेहद आसान हो जाएगा। सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि बिजली कंपनियां पहले से ही मुनाफे में हैं, इसलिए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना तर्कसंगत नहीं है।
किसकी कितनी होगी बचत?
| उपभोक्ता श्रेणी | राहत (प्रति यूनिट लगभग) |
| शहरी घरेलू उपभोक्ता | ₹1.53 तक की राहत |
| शहरी व्यवसायिक उपभोक्ता | ₹1.20 की राहत |
| ग्रामीण व्यवसायिक उपभोक्ता | 42 पैसे की बचत |