पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के साथ हुए जघन्य अपराध और उसकी संदिग्ध मौत के मामले ने अब एक बड़े जन-आक्रोश का रूप ले लिया है। घटना के करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी ठोस कार्रवाई न होने से नाराज होकर पीड़िता का परिवार रविवार को गर्दनीबाग धरनास्थल पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गया है।

परिजनों का छलका दर्द;
धरने पर बैठी पीड़िता की माँ का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने रोते हुए जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। माँ का कहना है कि उन्हें अब CBI की जांच पर विश्वास नहीं रहा क्योंकि एजेंसी न्याय दिलाने के बजाय परिवार को ही मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है। पीड़िता के पिता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि CBI ने ‘टॉर्चर की सारी सीमाएं पार कर दी हैं’। उन्होंने वर्तमान शासन की तुलना ‘कंस और दुर्योधन’ के राज से करते हुए कहा कि अब उन्हें केवल न्यायालय से ही अंतिम उम्मीद बची है।
जांच की अब तक की स्थिति;
| एजेंसी/टीम | स्थिति |
| पटना पुलिस/SIT | शुरुआती जांच में विफल रही, जिसके बाद मामला CBI को सौंपा गया। |
| CBI (पटना टीम) | स्थानीय टीम भी किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी, जिस पर कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई। |
| CBI (दिल्ली टीम) | कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब जांच ‘एंटी करप्शन ब्रांच-2’ (दिल्ली) को सौंपी गई है। |
न्यायिक हस्तक्षेप और गिरफ्तारी;
हॉस्टल मालिक की स्थिति: हॉस्टल का मालिक मनीष रंजन वर्तमान में बेउर जेल में बंद है। 16 मार्च को पटना के पॉक्सो कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जांच में अभी कई गंभीर खामियां हैं।सुनवाई के दौरान अदालत ने भी CBI की ढुलमुल जांच पर नाराजगी जाहिर की थी।
आगामी चेतावनी;
सामाजिक कार्यकर्ता पुष्कर आनंद और अन्य प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल एक बेटी का मामला नहीं, बल्कि पूरे बिहार की महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। यदि दिल्ली से आई CBI की टीम भी जल्द ही किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँचती, तो यह शांतिपूर्ण धरना एक बड़े राज्यव्यापी आंदोलन में बदल जाएगा।