भारत की आगामी जनगणना केवल नंबरों का खेल नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक ढाँचे का एक दस्तावेज़ बनने जा रही है। 1 अप्रैल से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया में सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक प्रगतिशील रुख अपनाया है।

लिव-इन जोड़ों के लिए क्या बदला है?
अब तक जनगणना में रिश्तों की श्रेणियाँ सीमित थीं, लेकिन 2027 की गणना में समाज की वास्तविकता को स्वीकार किया गया है। दरअसल, जो जोड़े बिना विवाह के साथ रह रहे हैं और अपने रिश्ते को स्थायी मानते हैं, उन्हें ‘विवाहित’ (Married) की श्रेणी में ही दर्ज किया जाएगा। इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी खूबी ‘स्व-घोषणा’ (Self-declaration) है। आपसे कोई मैरिज सर्टिफिकेट, हलफनामा या कानूनी सबूत नहीं मांगा जाएगा। आपकी बताई जानकारी को ही अंतिम सत्य माना जाएगा।

समय-सीमा और प्रक्रिया (Schedule);
जनगणना का कार्य 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच पूरा किया जाएगा, जिसे दो मुख्य चरणों में बांटा गया है। प्रथम चरण (Self-Enumeration) के शुरुआती 15 दिनों में नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। द्वितीय चरण (Field Work) में अगले 30 दिनों में प्रगणक (Enuerators) उन घरों का दौरा करेंगे जिन्होंने ऑनलाइन डेटा नहीं भरा है।

डिजिटल पोर्टल;
सरकार ने ‘डिजिटल इंडिया’ की तर्ज पर एक विशेष पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया है। इसके लाभ:
– HLO और जनसंख्या गणना: घर की लिस्टिंग और व्यक्तिगत जानकारी दोनों ऑनलाइन भरी जा सकेंगी।
– FAQ सुविधा: लिव-इन जोड़ों और अन्य परिवारों के संशय दूर करने के लिए पोर्टल पर विस्तृत मार्गदर्शिका उपलब्ध है।
आपसे क्या पूछा जाएगा?
| श्रेणी | पूछे जाने वाले मुख्य विवरण |
| पारिवारिक ढांचा | परिवार के मुखिया का लिंग, सामाजिक वर्ग (SC/ST/अन्य) और कुल सदस्यों की संख्या। |
| आवास की स्थिति | घर की छत, दीवार और फर्श की सामग्री (कंक्रीट, ईंट या मिट्टी)। |
| सुविधाएं & संपत्ति | पीने के पानी का स्रोत, बिजली, शौचालय की सुविधा और अनाज का प्रकार। |
| परिवहन & गैजेट्स | साइकिल, स्कूटर, कार, लैपटॉप और इंटरनेट की उपलब्धता। |
| वैवाहिक स्थिति | घर में रहने वाले कुल विवाहित जोड़ों (लिव-इन सहित) की संख्या। |