बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। नीतीश कुमार को लेकर सुरक्षा और राजनीतिक दोनों स्तर पर अहम फैसले हुए हैं। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उन्हें Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा दी जाएगी।

दरअसल, यह निर्णय बिहार सरकार के गृह विभाग ने बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत लिया है। इस कानून के अनुसार, संवेदनशील व्यक्तियों को उनकी स्थिति और जोखिम के आधार पर विशेष सुरक्षा दी जाती है। सरकारी अधिसूचना में यह भी उल्लेख है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा सदस्य के रूप में नई भूमिका संभाल सकते हैं। खबरों के मुताबिक, वे 10 अप्रैल को दिल्ली में राज्यसभा की शपथ ले सकते हैं और 13 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। इस घटनाक्रम के साथ ही बिहार की राजनीति में नए दौर की चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि 14 अप्रैल के बाद राज्य में नई सरकार का गठन हो सकता है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस बार मुख्यमंत्री पद भारतीय जनता पार्टी के पास जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो करीब दो दशकों बाद बिहार को नया चेहरा मुख्यमंत्री के रूप में देखने को मिलेगा। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि नए मुख्यमंत्री के चयन में नीतीश कुमार की सहमति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बिहार की राजनीति में इससे पहले 1990 से 2005 तक लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का प्रभाव रहा, जबकि 2005 के बाद से (कुछ महीनों को छोड़कर) नीतीश कुमार लगातार सत्ता में बने रहे हैं। कुल मिलाकर, यह बदलाव न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था बल्कि बिहार की राजनीतिक दिशा को भी नए सिरे से तय कर सकता है।