बिहार में खसरा-रूबेला संक्रमण को लेकर हालात पहले की तुलना में काफी बेहतर हुए हैं, लेकिन अभी भी पूरी तरह खतरा टला नहीं है। राज्य के 7 जिलों में अब भी संक्रमण के कुछ मामले सामने आ रहे हैं, जिन्हें देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इन क्षेत्रों को विशेष निगरानी (हाई प्रायोरिटी) में रखा है, ताकि बीमारी अन्य जिलों में न फैल सके।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक कुल 11 मामले दर्ज किए गए हैं। यह संख्या पिछले साल 2025 के 79 मामलों की तुलना में काफी कम है, जो इस बात का संकेत है कि राज्य में चल रहा टीकाकरण अभियान प्रभावी साबित हो रहा है। वहीं, 32 जिलों में संक्रमण की स्थिति काफी नियंत्रण में है, जहां मामलों की संख्या दो या उससे भी कम रह गई है। सरकार ने वर्ष 2026 को खसरा-रूबेला उन्मूलन का लक्ष्य वर्ष घोषित किया है। इसके तहत यह तय किया गया है कि हर जिले में साल भर के दौरान अधिकतम दो या उससे कम मामले हों और कम से कम 95 प्रतिशत बच्चों को एमएमआर (Measles-Mumps-Rubella) टीका लगाया जाए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार के पीछे सबसे बड़ी भूमिका व्यापक टीकाकरण अभियान की है। खसरा-रूबेला का टीका बच्चों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर बच्चों को टीका लगा रहे हैं। साथ ही, जो बच्चे किसी कारणवश छूट गए थे, उनके लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सेविकाओं ने लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने अभिभावकों को टीकाकरण के महत्व के बारे में समझाया, जिससे पहले जो हिचकिचाहट थी, वह अब काफी हद तक कम हो गई है। यही वजह है कि आज राज्य के 31 जिले ऐसे हैं, जहां या तो कोई मामला नहीं है या बहुत ही कम मामले हैं। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग का पूरा ध्यान उन 7 जिलों पर केंद्रित है, जहां अभी भी 11 मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों में जैसे ही कोई नया मामला मिलता है, तुरंत एक विशेष टीम भेजकर जांच और नियंत्रण के उपाय शुरू कर दिए जाते हैं। गौरतलब है कि आगे की रणनीति के तहत विभाग माइक्रो-प्लानिंग पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य उन बस्तियों, टोले और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना है, जहां अब तक टीकाकरण पूरी तरह नहीं हो पाया है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में इन 7 जिलों में भी संक्रमण के मामलों को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए और बिहार को खसरा-रूबेला मुक्त राज्य बनाया जा सके।