बिहार की राजनीति ने एक बार फिर करवट ली है। 15 अप्रैल 2026 को राज्य के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ेगा जब पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कोई नेता मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा। ताज्जुब की बात यह है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता ने जिस NDA को प्रचंड बहुमत दिया था, उसे मिले अभी मात्र 5 महीने ही हुए थे।

सत्ता के बदलते समीकरण: एक नजर में
| तारीख | मुख्यमंत्री | गठबंधन/कारण |
| 2010 – 2014 | नीतीश कुमार | NDA (भाजपा के साथ पूर्ण बहुमत)। |
| मई 2014 | जीतनराम मांझी | लोकसभा चुनाव में हार के बाद नीतीश का इस्तीफा। |
| फरवरी 2015 | नीतीश कुमार | मांझी से अनबन के बाद दोबारा कमान संभाली। |
| नवंबर 2015 | नीतीश कुमार | राजद (लालू यादव) के साथ महागठबंधन की सरकार। |
| जुलाई 2017 | नीतीश कुमार | भ्रष्टाचार का मुद्दा बना राजद छोड़ा, फिर भाजपा के साथ। |
| अगस्त 2022 | नीतीश कुमार | भाजपा छोड़ी, तेजस्वी यादव के साथ ‘INDIA’ गठबंधन की नींव। |
| जनवरी 2024 | नीतीश कुमार | लोकसभा चुनाव से पहले फिर पलटी मारी, भाजपा संग सरकार। |
| नवंबर 2025 | नीतीश कुमार | चुनाव जीता, 10वीं बार मुख्यमंत्री बने। |
| 15 अप्रैल 2026 | भाजपा CM | नीतीश का इस्तीफा, बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री। |
पिछले 15 वर्षों में बिहार में चार विधानसभा चुनाव हुए और हर बार जनता ने स्पष्ट बहुमत की सरकार चुनी, लेकिन इसके बावजूद नीतीश कुमार ने कुल 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके पीछे उनकी बदलती राजनीतिक रणनीतियों और महत्वाकांक्षाओं को मुख्य वजह माना जाता है। साल 2013 में उन्होंने पहली बार भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़ा, जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया। इस फैसले से नीतीश कुमार असहमत थे और खुद को राष्ट्रीय स्तर का विकल्प मानते थे। उस समय सुशील कुमार मोदी ने भी उन्हें पीएम पद के योग्य बताया था। दूसरी बार अगस्त 2022 में उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ा और विपक्षी दलों को साथ लेकर INDIA गठबंधन बनाया। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले वे फिर भाजपा के साथ आ गए।

राजनीतिक विश्लेषक संजय सिंह का मानना है कि नीतीश कुमार ने सत्ता का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए किया, जिससे स्थिर सरकारें भी अस्थिर हुईं और जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। आर्थिक सर्वे 2025-26 के अनुसार बिहार की प्रति व्यक्ति आय सालाना 76,490 रुपए (करीब 6,374 रुपए प्रति माह) है, जो देश में सबसे कम है। राज्य पर 3.74 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा कर्ज है, जो GSDP का 37.7% है। हर 100 में से 30 बच्चे 9वीं-10वीं के बीच पढ़ाई छोड़ देते हैं। 38 छात्रों पर सिर्फ 1 शिक्षक उपलब्ध है। स्वास्थ्य सेवाओं में 1 लाख लोगों पर सिर्फ 1 डॉक्टर और 21 बेड हैं। हर साल लगभग 30 लाख मजदूर रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं। कार्यबल में केवल 30% लोगों के पास ही रोजगार है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि औद्योगिक विकास बेहद कमजोर है और विनिर्माण क्षेत्र में राज्य का योगदान लगभग नगण्य है।

नेताओं की संपत्ति में इजाफा;
राजनीतिक बदलावों के बीच कई नेताओं की संपत्ति में बड़ा इजाफा देखा गया। नीतीश कुमार की संपत्ति 2015 में 58.97 लाख से बढ़कर 2025 में 1.65 करोड़ रुपए हुई। तेजस्वी यादव की संपत्ति 1.18 करोड़ से बढ़कर लगभग 8 करोड़ रुपए हो गई। सम्राट चौधरी की संपत्ति 30 लाख से बढ़कर 6.38 करोड़ रुपए तक पहुंची। विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव की संपत्ति भी लगभग 3 गुना बढ़ी। अशोक चौधरी की संपत्ति 10 साल में 1 करोड़ से बढ़कर 42 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई