सिनेमाई करिश्मा बनाम चुनावी हकीकत: विजय की TVK ने बिगाड़ा समीकरण ? नतीजों से पहले हाई अलर्ट!

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा का प्रभाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव ने इस संबंध को एक नए और चिंताजनक स्तर पर पहुंचा दिया है। राज्य के स्टार-ड्रिवन राजनीतिक माहौल में एक ऐसा ट्रेंड उभरकर सामने आ रहा है, जिसे पारंपरिक चुनावी आंकड़ों या इलेक्शन कमीशन के डेटा से मापा नहीं जा सकता। आशंका जताई जा रही है कि 4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद एक अलग तरह का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक संकट खड़ा हो सकता है।

नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और बच्चों के हितों के लिए काम करने वाले संगठनों को डर है कि यदि अभिनेता-राजनेता विजय मुख्यमंत्री नहीं बनते हैं, तो उनके युवा समर्थक, खासकर Gen-Z और किशोर वर्ग, भावनात्मक रूप से टूट सकते हैं और कुछ चरम कदम उठाने की कोशिश कर सकते हैं। यह चिंता इसलिए भी गहरी है क्योंकि 23 अप्रैल 2026 को मतदान के दिन कई बच्चों और किशोरों को अपने परिवार के बड़ों से विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम (TVK)’ को वोट देने की अपील करते देखा गया।

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दरअसल, पार्टी नेतृत्व ने युवाओं से यह अपील की थी कि वे अपने घरों में बड़े मतदाताओं को प्रभावित करें। यह रणनीति डिजिटल युग और एल्गोरिदम आधारित प्रचार के साथ मिलकर एक नया सामाजिक प्रभाव पैदा कर रही है, जहां राजनीतिक समर्थन केवल विचारधारा नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का रूप ले चुका है।

हालांकि तमिलनाडु में पिछले 70 वर्षों से सिनेमा और राजनीति का गहरा संबंध रहा है, लेकिन इस बार की स्थिति अलग है। TVK एक नई पार्टी है, जिसका गठन महज दो साल पहले हुआ है। ऐसे में 15-20% वोट शेयर हासिल करना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह सीटों में उसी अनुपात में तब्दील नहीं हो सकता।

वर्तमान चुनावी अनुमानों में मुख्य मुकाबला DMK और AIADMK के बीच माना जा रहा है, जबकि TVK को ‘स्पॉइलर’ की भूमिका में देखा जा रहा है। विजय ने चुनावी नैरेटिव को DMK बनाम TVK बनाकर अन्य दलों को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसका असर AIADMK पर ज्यादा पड़ता दिख रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि परिणाम के दिन समर्थकों में निराशा की संभावना अधिक है। ऐसे में प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती यह होगी कि किसी भी प्रकार की भावनात्मक प्रतिक्रिया को नियंत्रित किया जाए और संभावित दुर्घटनाओं को रोका जाए। 2025 की करूर भगदड़ जैसी घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।

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