अखिलेश प्रसाद सिंह को हटाकर लालू के खिलाफ कांग्रेस का ऐलान ए जंग.

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सिटी पोस्ट लाइव :बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह की छुट्टी कर दी है.दलित  विधायक राजेश कुमार को नया प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है.सबके जेहन में ये सवाल है- अखिलेश प्रसाद सिंह जैसे कद्दावर नेता को क्यों हटाया गया?अखिलेश प्रसाद सिंह की लालू प्रसाद यादव से नजदीकी छिपी हुई नहीं है. 2004 में  अखिलेश प्रसाद सिंह मोतिहारी से आरजेडी के टिकेट पर लोकसभा का चुनाव जीते थे. तब अखिलेश प्रसाद सिंह को लालू यादव ने केंद्र में कृषि, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण का राज्य मंत्री पद दिलवा दिया था.

अखिलेश प्रसाद सिंह का इसके बाद लालू प्रसाद यादव से सम्बन्ध खराब हो गया.फिर अखिलेश प्रसाद ने  कांग्रेस का हाथ थाम लिया. इसके बाद वो 2009 में पूर्वी चंपारण से लोकसभा का चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली. बावजूद इसके वो कांग्रेस में टिके रहे. फिर कांग्रेस के टिकट पर उन्हें 2014 में मुजफ्फरपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला, लेकिन उस चुनाव में भी उन्हें हार मिली.इसके बाद 2015 में उन्होंने तरारी विधानसभा से भी कांग्रेस के टिकट पर भाग्य आजमाया लेकिन वहां भी उनकी शिकस्त हुई.

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 कांग्रेस ने उनका ट्रैक रिकॉर्ड देखते हुए उन्हें 2018 में राज्यसभा भेजा.2024 में भी वो दोबारा कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा भेजे गए. इसके पहले 2022 में उन्हें बिहार कांग्रेस का अध्यक्ष भी बना दिया गया.हालांकि 2019 में कांग्रेस और राजद के बीच सीट बंटवारे को लेकर काफी किचकिच हुई. सियासी गलियारे में कहा जाता है कि वो अखिलेश प्रसाद सिंह ही थे जिन्होंने कांग्रेस और राजद में सीटों पर समझौता करवाने में अहम भूमिका निभाई.अब जब कांग्रेस ने अखिलेश प्रसाद को अध्यक्ष पद से हटा दिया है ,भूमिहार समाज नाराज हो सकता है.लेकिन कांग्रेस ने  अखिलेश प्रसाद सिंह को हटाने से पहले उनके सजातीय कन्हैया कुमार (भूमिहार जाति से आते हैं) को पदयात्रा के बहाने बड़ा चेहरा बनाकर खड़ा कर दिया. इसके बाद कांग्रेस ने राजेश कुमार को बिहार कांग्रेस का अध्यक्ष बनाकर दलितों को भी साधने वाला दांव चल दिया.

कई नेता अर्से से इस बात का इंतजार कर रहे थे कि वो गठबंधन की जकड़न से आजाद हों और कांग्रेस को 90 के दशक से पहले की तरह बिहार की सत्ता में अपने दम पर ले आएं. कहा जाता है कि ऐसे नेताओं के सामने अखिलेश सिंह एक दीवार की तरह थे. माना जाता है कि अखिलेश सिंह ने राजद जरूर छोड़ दिया था लेकिन उसके बाद भी उनकी लालू प्रसाद यादव से अच्छी बनती थी.इस बात का जवाब बिहार कांग्रेस के नए प्रभारी कृष्णा अल्लावरु इशारों में दे चुके हैं. हाल ही में उन्होंने पटना एयरपोर्ट पर दो टूक कह दिया था कि कांग्रेस अब जनता (बिहार की) की A टीम बन कर काम करेगी. ये कांग्रेस का बिहार को लेकर इरादा बताने के लिए काफी था.

अब कांग्रेस बिहार में फ्रंट फुट पर खेलने का मूड बना रही है. ये भी लग रहा है कि कांग्रेस इस विधानसभा चुनाव में राजद की तरफ से मिलने वाले सीटों के ‘ऑफर’ को एक झटके में कबूल करनेवाली नहीं. इस दफे राजद और कांग्रेस में सीट बंटवारे पर सियासी दंगल हो सकता है.  हालात और बयान तो ऐसे ही इशारे कर रहे हैं. अब सवाल यही है कि इसका अंजाम क्या होगा? हालांकि कुछ दिनों में ये भी साफ हो जाएगा.

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