इसबार आसान नहीं होगा तेजस्वी के रथ को रोकना,तैयार है सोशल इंजीनियरिंग का नया फ़ॉर्मूला.

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सिटी पोस्ट लाइव :तेजस्वी यादव इस चुनाव में नए जातीय समीकरण के जरिये चुनाव में उतरने की तैयारी कर चुके हैं.वो किसी भी कीमत पर इस चुनाव में अति पिछड़ा वोट बैंक को साधना चाहते हैं.तेजस्वी यादव इसबार यादवों की जगह ज्यादा से ज्यादा टिकेट अपने  कोर वोटर मुस्लिम और अति-पिछड़ा समाज को देगें. अति पिछड़ा और मुस्लिम जातियों को अपने पक्ष में लामबंद करने की तेजस्वी की रणनीति है. अति पिछड़ी मुस्लिम नेताओं में नेतृत्व उभारने की शुरुआत उन्होंने कर दी है.

तेजस्वी यादव संगठन की प्रांतीय और राष्ट्रीय कार्यकारिणी से लेकर विधानसभा के प्रत्याशी के चयन में इसबार अति पिछड़ा और मुस्लिम को ज्यादा तवज्जो देने जा रहे हैं.बिहार में मुसलमानों में अति पिछड़ा जातियों की संख्या करीब 67 फीसदी है. यह मुसलमानों में ऐसा वर्ग है, जिसके वोट पर अधिकतर मुस्लिम चुनाव जीतते आये हैं. जबकि इसमें इस वर्ग के प्रतिनिधियों की संख्या काफी कम होती है. इस परिदृश्य में सियासी जानकारों का कहना है कि संभव है कि अगड़े वर्ग के मुस्लिम बहुत कम दिखाई दें. अभी आरजेडी में अधिकतर मुस्लिम नेता अगड़े समाज के आते हैं.
अपनी इसी रणनीति के तहत तेजस्वी यादव ने  ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी की महागठंधन में शामिल करने के आग्रह को खारिज कर दिया है. आरजेडी ने अपने कोर वोटर मुस्लिमों पर भरोसा जताया है. जानकारों का यह भी कहना है कि तेजस्वी यादव  अपने कोर वोटर में किसी की हिस्सेदारी स्वीकार नहीं करनेवाले.इसके लिए उसने अपने कोर मुस्लिम वोटर्स में भी अति पिछड़ी जातियों के बीच पैठ बढ़ा दी है. उनकी लीडरशिप को आगे बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है.

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तेजस्वी यादव ने विभिन्न आधार पर सर्वे कराया है .सर्वे के अनुसार  जितनी ताकत से आरजेडी ने वक्फ बिल का विरोध किया है. उतनी ताकत किसी और दल ने नहीं दिखाई है. सर्वे में सामने आया है कि एआइएमआइएम को वोट देकर मुस्लिम समाज महागठबंधन को कमजोर करने के पक्ष में नहीं है. तेजस्वी yadav ये समझ रहे हैं कि जब भी हिंदू -मुस्लमान का नारा उछाला जाता है  उसका फायदा आरजेडी  को कम बीजेपी को अधिक होता है. इसलिए इसबार तेजस्वी यादव  एआइएमआइएम को महागठबंधन में शामिल कर हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण नहीं करना चाहते.राज्य में अति पिछड़ा वर्ग की 112 जातियो में मुस्लिम समाज में 24 जातियां हैं.

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